शहबाज शरीफ के ‘कश्मीर राग’ पर पेटल बोलीं- ‘ये सेना की कठपुतली सरकार’

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संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ द्वारा एक बार फिर जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाए जाने पर भारत ने तीखा पलटवार किया है। भारत ने पाकिस्तान के बयान को अजीबोगरीब बताते हुए स्पष्ट किया कि जम्मू और कश्मीर भारत का अभिन्न व अविभाज्य अंग है और इस मुद्दे पर किसी भी तरह का कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की फर्स्ट सेक्रेटरी पेटल गहलोत (Petal Gahlot) ने पाकिस्तान को उसकी ‘आतंकवाद, धोखेबाजी और दोहरेपन’ की नीति के लिए आड़े हाथों लेते हुए करारा जवाब दिया।

ओसामा बिन लादेन और ‘फॉर्म 47’ का जिक्र

भारतीय राजनयिक पेटल गहलोत ने अपने ‘राइट टू रिप्लाई’ (जवाब देने का अधिकार) का इस्तेमाल करते हुए कहा, “आज दोपहर जनरल असेंबली ने पाकिस्तान के प्रतिनिधि की कुछ अजीब बातें सुनीं। यह उस समय हो रहा है जब दुनिया हाल ही में भयानक आतंकवादी हमले की 25वीं बरसी मना रही है।”

उन्होंने ओसामा बिन लादेन का जिक्र करते हुए पाकिस्तान को आईना दिखाया। गहलोत ने कहा, “यह ध्यान रखना जरूरी है कि उस हमले का मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन पाकिस्तानी सेना की प्रमुख अकादमी के ठीक पास रह रहा था। आज पाकिस्तान के प्रतिनिधि ने उसी सेना के प्रति गहरा सम्मान दिखाया है।”

उन्होंने शहबाज शरीफ सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा, “पाकिस्तान के लोग खुद इस सरकार को ‘फॉर्म 47’ (Form 47) सरकार कहते हैं, उससे ऐसी ही उम्मीद की जा सकती है।” बता दें कि ‘फॉर्म 47’ का इस्तेमाल पाकिस्तान में विपक्षी पार्टियां (खासकर इमरान खान की पीटीआई) शहबाज सरकार पर चुनावी नतीजों में हेरफेर का आरोप लगाने के लिए करती हैं।

“सेना का, सेना द्वारा और सेना के लिए शासन”

भारत ने पाकिस्तान की राजनीतिक स्थिति और मानवाधिकारों के हनन पर भी कड़ा प्रहार किया। पेटल गहलोत ने कहा, “हमने लोकतांत्रिक अधिकारों और मानवीय मूल्यों पर एक ऐसे शासन से पाखंडी उपदेश सुने, जिसकी राजधानी इस समय अपने ही लोगों के खिलाफ किले में तब्दील हो रही है।”

उन्होंने कहा, “वहां उनके कठपुतली आते-जाते रह सकते हैं, लेकिन हमें इस भ्रम में नहीं रहना चाहिए कि फैसले कौन करता है। वहां सेना का, सेना द्वारा और सेना के लिए शासन चलता है। वे दिन में सुरक्षा का दावा करते हैं और रात में आतंकवाद को अंजाम देते हैं।”

“PoK के लोगों से पूछिए सच्चाई”

पाकिस्तान द्वारा बार-बार अल्पसंख्यकों और कश्मीर का मुद्दा उठाए जाने पर भारत ने कहा कि दुनिया जानती है कि पाकिस्तान में धार्मिक असहिष्णुता और ईशनिंदा कानूनों के जरिए अल्पसंख्यकों के साथ कैसा बर्ताव होता है।

कश्मीर पर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए गहलोत ने कहा, “जम्मू कश्मीर मेरे देश का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है और हमेशा रहेगा। लेकिन अगर हमें कश्मीर पर चर्चा करनी ही है, तो आइए पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू कश्मीर (PoK) की बात करें। रावलकोट के लोगों से वहां लंबे समय से हो रही मनमानी हत्याओं, क्रूर हिंसा और बुनियादी अधिकारों के हनन के बारे में पूछिए।”

शहबाज शरीफ ने क्या कहा था?

इससे पहले पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ ने UNGA में एक पुराना राग अलापा था। उन्होंने दावा किया था कि एक साल पहले पाकिस्तान को भारत की ओर से हमले का सामना करना पड़ा था, जिसका पाकिस्तानी सेना (फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के नेतृत्व में) ने करारा जवाब दिया।

शरीफ ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का भी जिक्र किया और दावा किया कि ट्रंप के समय पर किए गए हस्तक्षेप से दक्षिण एशिया में करोड़ों लोगों की जान बचाई जा सकी, जब दोनों परमाणु संपन्न देश युद्ध की कगार पर थे। शरीफ ने कहा कि दक्षिण एशिया को फिर से उस स्थिति में जाने से रोकने के लिए “कश्मीर विवाद का न्यायपूर्ण समाधान” जरूरी है।