‘राहुल गांधी की राजनीतिक समझ शून्य, वे अपनी सीट भी सहयोगियों के दम पर जीतते हैं’: सुधांशु

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लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा चुनाव आयोग और ‘एंटी-इंकम्बेंसी’ (सत्ता-विरोधी लहर) को लेकर दिए गए बयानों पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने तीखा पलटवार किया है। बीजेपी सांसद और राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए राहुल गांधी के राजनीतिक ज्ञान और समझ पर सवाल खड़े किए और उनके दावों को खारिज कर दिया।

‘राहुल गांधी की राजनीतिक समझ शून्य’

प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत करते हुए सुधांशु त्रिवेदी ने तंज कसते हुए कहा कि राहुल गांधी की राजनीतिक समझ “शून्य” है। उन्होंने कहा कि वह अक्सर अपनी राजनीतिक बातों के समर्थन में कहीं से लाई गई पीपीटी (PPT) या आंकड़े दिखाते हैं, जिनका जमीनी हकीकत से कोई ताल्लुक नहीं होता।

सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी के उस दावे पर भी कड़ा एतराज जताया जिसमें उन्होंने कहा था कि वह 50 साल से भारत की राजनीति देख रहे हैं। इस पर तंज कसते हुए बीजेपी सांसद ने कहा, “वह कह रहे हैं कि 50 साल से राजनीति देख रहे हैं—यानी वह सिर्फ 5-6 साल की उम्र से ही सब कुछ जान रहे हैं।”

‘एंटी-इंकम्बेंसी कांग्रेस के अंदर है’

राहुल गांधी के ‘एंटी-इंकम्बेंसी’ वाले बयान का जवाब देते हुए सुधांशु त्रिवेदी ने ऐतिहासिक आंकड़े सामने रखे और कहा कि असल में सत्ता-विरोधी लहर या असंतोष तो खुद कांग्रेस पार्टी के भीतर रहा है।

  • उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में 1977 के बाद से कांग्रेस कभी सत्ता में वापस नहीं लौट पाई।

  • बिहार में 1990 के बाद से कांग्रेस अपने दम पर कभी सत्ता में नहीं रही।

  • यहां तक कि गांधी परिवार के गढ़ माने जाने वाले उत्तर प्रदेश में भी 1989 के बाद से कांग्रेस का जनाधार लगातार गिरता गया।

सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, “जिस दौर में बूथ कैप्चरिंग होती थी और खुलेआम गोलियां चलती थीं, तब भी कांग्रेस के खिलाफ एंटी-इंकम्बेंसी काम करती थी। लेकिन जब से देश में सीसीटीवी कैमरे लगे और चुनाव प्रणाली पारदर्शी व मजबूत हुई है, तब से कांग्रेस को इसका और अधिक नुकसान उठाना पड़ा है।”

‘बिना सहयोगियों के अपनी पारंपरिक सीट भी नहीं बचा सकते’

बीजेपी प्रवक्ता ने राहुल गांधी के चुनावी रसूख पर सवाल उठाते हुए कहा कि वह अपनी पार्टी और खुद की जीत के लिए भी क्षेत्रीय दलों पर निर्भर हैं। उन्होंने कहा कि वायनाड का चुनाव भी मुस्लिम समर्थन के बिना जीतना संभव नहीं था, और अपनी खानदानी सीटों (अमेठी और रायबरेली) को बचाने के लिए भी उन्हें समाजवादी पार्टी के समर्थन की जरूरत पड़ी।

सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि जो नेता बिना सहयोगियों के अपनी पारंपरिक सीटें नहीं जीत सकता, वह देश की पूरी लोकतांत्रिक व्यवस्था और चुनाव आयोग पर सवाल खड़े कर रहा है। बीजेपी ने स्पष्ट किया कि राहुल गांधी के आरोप केवल उनकी राजनीतिक हताशा को दर्शाते हैं, क्योंकि जनता ने बार-बार उनके नेतृत्व को नकार दिया है।