‘वोट चोरी से कानून और फिर संस्थाओं की चोरी’: चुनाव आयोग पर बरसे राहुल गांधी

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विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मतदाता सूची को लेकर जारी राजनीतिक और संस्थागत विवाद के बीच लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुनाव आयोग (ECI) की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल खड़े किए हैं। SIR प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों से जुड़ी दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों वाली हालिया मीडिया रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए राहुल गांधी ने भारतीय राजनीति की मूल ताकतों और मौजूदा चुनावी व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर चिंता जताई।

‘भारत में एंटी-इंकम्बेंसी एक बुनियादी ताकत, मोदी-शाह के मामले में ऐसा क्यों नहीं?’

प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि वह एक राजनीतिक परिवार से आते हैं और उन्होंने अपने जीवन के 50 से अधिक साल राजनीति के बीच बिताए हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय राजनीति में ‘सत्ता-विरोधी लहर’ (Anti-Incumbency) एक बुनियादी और शक्तिशाली राजनीतिक ताकत रही है, जो तेजी से किसी भी सरकार के खिलाफ माहौल बना सकती है और इतिहास में किसी भी बड़े नेता को इससे छूट नहीं मिली है।

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा, “इंदिरा गांधी ने बांग्लादेश युद्ध जीता था और वह अपनी लोकप्रियता के चरम पर थीं, फिर भी एक-दो साल के भीतर उन्हें भारी राजनीतिक दबाव और सत्ता-विरोधी लहर का सामना करना पड़ा। कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों के नेताओं को भी लगातार इसका सामना करना पड़ता रहा है।” इसके बाद सवाल उठाते हुए राहुल गांधी ने कहा कि उन्हें यह समझ नहीं आता कि नरेंद्र मोदी, अमित शाह और बीजेपी के मामले में यह सत्ता-विरोधी लहर पूरी तरह गायब क्यों नजर आती है।

चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों और SIR प्रक्रिया पर सवाल

राहुल गांधी ने SIR प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और चुनाव आयोग की आंतरिक व्यवस्था का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कामकाज और कार्यप्रणाली पर अब खुद उनके दो साथी चुनाव आयुक्त भी गंभीर सवाल उठा रहे हैं।

राहुल गांधी ने आरोप लगाया, “चुनाव आयोग वोट का संस्थागत संरक्षक है। हमने चुनावों में कथित गड़बड़ी और धांधली से जुड़े सबूत पहले ही देश के सामने रखे हैं। आज जब दो चुनाव आयुक्त भी मुख्य चुनाव आयुक्त की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहे हैं, तो इससे पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता संदेह के घेरे में आ जाती है। वोटिंग सिस्टम में हुई इस कथित अव्यवस्था के लिए ज्ञानेश कुमार सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं।”

इसके साथ ही उन्होंने मांग की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से जुड़ी चयन प्रक्रिया के जरिए पद पर आए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तत्काल अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।

‘वोट चोरी से कानून और संस्थाओं की चोरी का सिलसिला’

राहुल गांधी ने चुनावी धांधली के आरोपों को एक गहरी साजिश से जोड़ते हुए कहा कि यह सिर्फ एक चुनाव या एक दल का मुद्दा नहीं है।

उन्होंने कहा, “अगर वोट की चोरी होती है, तो उससे कानून की चोरी होती है और कानून की चोरी के बाद संस्थाओं की चोरी होती है। यह एक ऐसा खतरनाक सिलसिला है जो लगातार आगे बढ़ता है। अगर संसद में कोई सांसद कथित तौर पर चोरी किए गए वोट के आधार पर पहुंचा है, तो उसके द्वारा बनाया गया कोई भी कानून और संस्थागत बदलाव कानूनी रूप से वैध कैसे हो सकता है?”

उन्होंने हरियाणा, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और गुजरात का हवाला देते हुए कहा कि दुनिया की किसी भी स्वस्थ लोकतांत्रिक व्यवस्था में इस तरह सत्ता-विरोधी भावना का पूरी तरह गायब हो जाना सामान्य बात नहीं है। राहुल गांधी ने अंत में दोहराया कि मौजूदा विवाद को सिर्फ वोट तक सीमित नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि यह हर भारतीय नागरिक के बुनियादी अधिकारों और संविधान के अस्तित्व से जुड़ा हुआ सबसे बड़ा सवाल है।