ज्ञानेश कुमार पर विवाद, फॉर्म 6 में बदलाव और चिंतन शिविर से जुड़ी 4 प्रमुख बातें

cec gyanesh kumar

भारतीय चुनाव आयोग (ECI) में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) और नए मतदाता पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले ‘फॉर्म-6’ (Form 6) में किए गए बदलावों को लेकर भारी विवाद खड़ा हो गया है। इस मुद्दे पर चुनाव आयोग के भीतर ही मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। दो चुनाव आयुक्तों, सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली और फैसलों पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

इस आंतरिक विवाद के बाहर आने के बाद देश की सियासत भी गरमा गई है। विपक्ष इन बदलावों को वोट काटने की साजिश बता रहा है और ज्ञानेश कुमार के खिलाफ पहले से लंबित महाभियोग प्रस्ताव को लेकर दबाव तेज कर रहा है।

फॉर्म-6 में क्या बदलाव हुआ, जिस पर है विवाद?

नए वोट बनवाने के लिए ऑनलाइन भरे जाने वाले ‘फॉर्म-6’ में एक बड़ा बदलाव करते हुए बिना लेबल वाला एक ‘डिक्लेरेशन फॉर्म’ (घोषणा पत्र) जोड़ दिया गया है।

आरोप है कि इस नए सॉफ्टवेयर अपडेट (ECInet) के तहत लोगों को तीन विकल्पों में से किसी एक को चुनना अनिवार्य कर दिया गया है। ये विकल्प हैं:

  1. मेरा नाम पिछले SIR की वोटर लिस्ट में है।

  2. मेरे माता-पिता या दादा-दादी का नाम पिछले SIR की वोटर लिस्ट में है।

  3. न मेरा और न ही मेरे माता-पिता/दादा-दादी का नाम पिछले SIR की वोटर लिस्ट में है।

चुनाव आयुक्तों का कहना है कि इस ऑनलाइन फॉर्म को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि इन सवालों का जवाब दिए बिना रजिस्ट्रेशन फॉर्म ऑनलाइन सबमिट ही नहीं हो पा रहा है।

चुनाव आयुक्तों की 14 लिखित आपत्तियां

चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी ने दावा किया है कि वे पिछले 10 महीनों में फॉर्म-6 में बदलाव सहित 14 अलग-अलग मामलों पर मुख्य चुनाव आयुक्त के सामने लिखित असहमति और आपत्ति दर्ज करा चुके हैं।

  • अवैध बदलाव का आरोप: आयुक्तों का कहना है कि मतदाता पंजीकरण नियम 1960 में संशोधन किए बिना और बिना किसी गजट नोटिफिकेशन के फॉर्म-6 में यह बदलाव किया गया है, जो पूरी तरह गैर-कानूनी और अनधिकृत है।

  • डेटाबेस का केंद्रीकरण: द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, आयुक्तों ने वोटर लिस्ट के डेटाबेस (ECInet) के सेंट्रलाइजेशन (केंद्रीकरण) का भी विरोध किया है, जिसे सीधे दिल्ली हेड ऑफिस से जोड़ दिया गया है। उनका तर्क है कि इससे राज्य और स्थानीय अधिकारियों के अधिकार छिन गए हैं।

  • बिना सहमति के फैसले: दोनों आयुक्तों का आरोप है कि उनकी मंजूरी के बिना कई प्रशासनिक आदेश जारी कर दिए गए, नया IT पोर्टल लॉन्च कर दिया गया और यहां तक कि विभागों का बंटवारा भी उनकी सहमति के बिना कर दिया गया।

  • तकनीकी खामियां: यह भी दावा किया गया कि तकनीकी दिक्कतों (टेक्निकल ग्लिच) के कारण कई वैध वोटरों के नाम लिस्ट में नहीं जुड़ पाए।

स्थिति तब और गंभीर हो गई जब दोनों आयुक्तों ने कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन को अलग-अलग पत्र लिखकर इस पूरे घटनाक्रम की शिकायत की।

चुनाव आयोग, सरकार और विपक्ष का रुख

  • चुनाव आयोग: ECI ने चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेदों की खबरों को औपचारिक रूप से खारिज किया है। मुख्य चुनाव आयुक्त का कहना है कि SIR से जुड़े सभी फैसले दोनों आयुक्तों के साथ विचार-विमर्श करके और सहमति से ही लिए गए हैं।

  • विपक्ष का हमला: विपक्ष का आरोप है कि केंद्र सरकार SIR की आड़ में मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से कटवाकर भविष्य के चुनाव परिणामों को प्रभावित करना चाहती है। विपक्ष ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग कर रहा है।

  • केंद्र सरकार का बचाव: केंद्र सरकार ने विपक्ष के सभी आरोपों को बेबुनियाद और झूठा करार दिया है। सरकार का तर्क है कि फॉर्म-6 में ऐसा कोई बदलाव नहीं किया गया है जिससे देश के किसी भी वोटर को नुकसान हो।