भारत ने OIC को लगाई कड़ी फटकार: ‘कश्मीर हमारा आंतरिक मामला, पाकिस्तान के मनगढ़ंत प्रोपेगेंडा का मंच न बने संगठन’
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भारत ने बुधवार, 23 सितंबर 2026 को ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (OIC) के कॉन्टैक्ट ग्रुप द्वारा जम्मू-कश्मीर को लेकर की गई टिप्पणियों को सिरे से खारिज कर दिया है। न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र के दौरान हुई OIC की बैठक के बाद भारत ने कड़ा रुख अपनाते हुए इन टिप्पणियों को बेबुनियाद और तथ्यों से परे बताया। नई दिल्ली ने स्पष्ट किया कि OIC को पाकिस्तान को कश्मीर मुद्दा उठाने के लिए मंच देने के बजाय, खुद पाकिस्तान से जुड़े आतंकी और अन्य मुद्दों को हल करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
OIC की विश्वसनीयता पर विदेश मंत्रालय ने उठाए सवाल
भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि OIC को उन मामलों पर बयानबाजी करने का कोई हक नहीं है, जिन्हें भारत पूरी तरह से अपना आंतरिक मामला मानता है।
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अभिन्न अंग: मंत्रालय ने एक बार फिर दुनिया के सामने यह स्पष्ट किया कि केंद्र-शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न और अटूट हिस्सा हैं।
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क्रेडिबिलिटी पर सवाल: विदेश मंत्रालय ने OIC की विश्वसनीयता (Credibility) पर भी सवाल उठाए। भारत ने कहा कि एक ऐसे संगठन का बार-बार राजनीतिक मकसद से प्रेरित और झूठे नैरेटिव का समर्थन करना उसकी अपनी स्थिति और साख के लिए चिंता का विषय है।
पाकिस्तान को मंच देने पर भारत का पलटवार
भारत ने पाकिस्तान पर OIC के मंच का दुरुपयोग करने का सीधा आरोप लगाया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान इस मंच का इस्तेमाल जम्मू-कश्मीर के बारे में मनगढ़ंत और एक खास एजेंडे से प्रेरित दावों को बढ़ावा देने के लिए कर रहा है। भारत ने OIC को नसीहत दी कि वह ऐसे झूठे नैरेटिव को बढ़ावा देने के बजाय, पाकिस्तान को सही सलाह दे और उसे उसकी हकीकत दिखाए।
पाकिस्तान ने UN में क्या उठाया था मुद्दा?
OIC के जम्मू-कश्मीर कॉन्टैक्ट ग्रुप में पाकिस्तान के अलावा अजरबैजान, तुर्किये (तुर्की), सऊदी अरब और नाइजर शामिल हैं। UNGA की इस बैठक के दौरान पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने OIC सदस्यों से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर एक जैसी राय बनाए रखने की गुजारिश की थी। इसके साथ ही, डार ने पाकिस्तान का पुराना राग अलापते हुए 5 अगस्त 2019 (अनुच्छेद 370 हटाए जाने) के बाद भारत की तरफ से उठाए गए कदमों को वापस लेने, राजनीतिक कैदियों को रिहा करने और अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों को कश्मीर में ज्यादा एक्सेस देने की बेजा मांग की थी।
