September 20, 2026

‘गुजरात ड्राई स्टेट, फिर भी 600 मौतें; पूर्ण प्रतिबंध से बढ़ता है अवैध कारोबार और भ्रष्टाचार’

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देश में शराबबंदी (Liquor Ban) की नीतियों और उसके परिणामों को लेकर चल रही बहस के बीच सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की एक बेहद अहम टिप्पणी सामने आई है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि शराब पर पूर्ण प्रतिबंध हमेशा मनचाहे और अपेक्षित परिणाम नहीं देता; बल्कि कई बार इसके खतरनाक दुष्परिणाम सामने आते हैं।

अदालत ने गुजरात जैसे राज्य का उदाहरण दिया, जहां वर्षों से पूर्ण शराबबंदी लागू है, लेकिन फिर भी वहां कई बार जहरीली शराब (Hooch Tragedy) की बड़ी घटनाएं हो चुकी हैं। कोर्ट का मानना है कि प्रतिबंध अक्सर शराब के कारोबार को भूमिगत (Underground) कर देता है, जिससे राजस्व का नुकसान, भ्रष्टाचार और जनस्वास्थ्य के गंभीर खतरे पैदा होते हैं।

किस मामले की सुनवाई के दौरान आई टिप्पणी?

सुप्रीम कोर्ट की यह अहम टिप्पणी ‘मैसर्स बालाजी फॉर्मेलिन प्राइवेट लिमिटेड बनाम भारत संघ’ (M/s Balaji Formalin Pvt. Ltd. Vs Union of India) मामले की सुनवाई के दौरान आई।

  • जस्टिस जे.बी. पारदीवाला (Justice JB Pardiwala) और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ महाराष्ट्र पॉइजन्स रूल्स, 1972 के नियम 18A और 18B की संवैधानिक वैधता पर सुनवाई कर रही थी।

  • ये नियम मेथनॉल (Methanol) की खरीद, बिक्री और भंडारण को नियंत्रित करते हैं, जो जहरीली शराब बनाने में इस्तेमाल होने वाला एक मुख्य रसायन है।

गुजरात का उदाहरण: ‘ड्राई स्टेट’ की हकीकत

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने गुजरात की शराबबंदी नीति पर चिंता जताते हुए कहा, “गुजरात एक ‘ड्राई स्टेट’ है। इसके बावजूद राज्य के गठन के बाद से कम से कम 10 बड़ी जहरीली शराब त्रासदियां हो चुकी हैं, जिनमें 600 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है।”

अदालत ने कहा कि यह अनुभव साफ बताता है कि सिर्फ कानून बनाकर प्रतिबंध लगा देने से अवैध शराब का कारोबार खत्म नहीं होता, बल्कि यह और अधिक गुप्त तथा खतरनाक रूप ले लेता है।

सुप्रीम कोर्ट ने गिनाए शराबबंदी के 5 बड़े जोखिम

कोर्ट ने अपने अवलोकन में पूर्ण शराबबंदी से जुड़े पांच प्रमुख जोखिमों का भी जिक्र किया, जिन पर नीतियां बनाते समय विचार किया जाना चाहिए:

  1. राजस्व का नुकसान: सरकार को मिलने वाले भारी टैक्स और राजस्व में कमी आती है।

  2. प्रशासनिक खर्च: प्रतिबंध को लागू कराने और निगरानी रखने में प्रशासन का खर्च बढ़ जाता है।

  3. भ्रष्टाचार: पुलिस और अन्य प्रवर्तन एजेंसियों के भीतर भ्रष्टाचार (Corruption) की संभावना बढ़ती है।

  4. अवैध कारोबार: अवैध शराब निर्माण और तस्करी का सिंडिकेट पनपता है।

  5. अन्य नशे की लत: शराब न मिलने पर लोग अन्य नशीले पदार्थों और मादक द्रव्यों की ओर रुख कर सकते हैं।

मेथनॉल नियमों को बताया असंवैधानिक

सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र पॉइजन्स रूल्स के नियम 18A और 18B को असंवैधानिक करार दिया। इन नियमों के तहत मेथनॉल में रंग और कड़वाहट पैदा करने वाले रसायन मिलाना अनिवार्य था, ताकि उसका सेवन न किया जा सके। अदालत ने माना कि ये नियम संविधान के अनुच्छेद 14 और 19(1)(g) का उल्लंघन करते हैं और केवल रंग या कड़वाहट मिलाने से मेथनॉल के अवैध उपयोग (जहरीली शराब बनाने) को पूरी तरह नहीं रोका जा सकता।

हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि जनस्वास्थ्य की सुरक्षा जरूरी है, और मेथनॉल के दुरुपयोग को रोकने के लिए स्टॉक ऑडिट, कड़े सत्यापन और सीलिंग व्यवस्था जैसे विकल्प अपनाए जाने चाहिए।

(नोट: सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले में शराबबंदी की ‘संवैधानिक वैधता’ पर कोई अंतिम न्यायिक फैसला नहीं सुनाया है; यह टिप्पणी मेथनॉल नियमन से जुड़े मामले के संदर्भ में की गई थी।)