September 20, 2026

Trump ने रूस-ईरान प्रतिबंध कानून पर किए साइन, भारत पर 100% टैरिफ का खतरा

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ‘लिंडसे ओ. ग्राहम रूस और ईरान प्रतिबंध कानून 2026’ (Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026) पर आधिकारिक रूप से हस्ताक्षर कर दिए हैं। अमेरिकी संसद (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) से भारी बहुमत से पारित होने के बाद अब यह विधेयक औपचारिक रूप से कानून बन चुका है।

इस कानून के लागू होने के साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस आयात करने वाले तीसरे देशों—विशेष रूप से भारत और चीन—पर 100 प्रतिशत तक दंडात्मक आयात शुल्क (टैरिफ) लगाने का व्यापक अधिकार मिल गया है।

व्हाइट हाउस ने की कानून लागू होने की पुष्टि

व्हाइट हाउस द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, शुक्रवार को राष्ट्रपति ट्रंप ने इस कड़े प्रतिबंध कानून को अपनी मंजूरी दे दी:

  • रूस पर शिकंजा: कानून का प्राथमिक उद्देश्य रूस के ऊर्जा राजस्व को पूरी तरह रोकना है, ताकि उस पर भारी आर्थिक दबाव बनाकर यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने और बातचीत की मेज पर आने के लिए मजबूर किया जा सके।

  • ईरान पर दबाव: यह कानून ईरान पर पहले से लगे आर्थिक और व्यापारिक प्रतिबंधों के दायरे को और अधिक सख्त करता है, जिससे ईरान सैन्य टकराव छोड़कर अमेरिका के साथ परमाणु व व्यापारिक समझौते की दिशा में आगे बढ़े।

रूस की ‘शैडो फ्लीट’ और बैंकों पर सीधी कार्रवाई

इस कानून का मसौदा तैयार करने में करीब 12 महीने का वक्त लगा था। कानून के तहत रूस के ऊर्जा तंत्र को पंगु बनाने के लिए बहुस्तरीय पाबंदियों का प्रावधान किया गया है:

  • रूस की प्रमुख क्रूड ऑयल कंपनियों और उनके वित्तीय लेन-देन को संभालने वाले रूसी बैंकों को पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाएगा।

  • प्रतिबंधों को दरकिनार कर तेल ढोने वाले ‘शैडो फ्लीट’ (Shadow Fleet) टैंकरों पर कड़े प्रतिबंध और जब्ती के नियम लागू होंगे।

  • रूसी नीति-निर्माताओं और वरिष्ठ अधिकारियों की संपत्तियों व यात्राओं पर रोक लगाई जाएगी।

वाशिंगटन का तर्क है कि कच्चे तेल के निर्यात से मिलने वाली विदेशी मुद्रा का उपयोग रूस सीधे यूक्रेन के खिलाफ युद्ध और हथियार निर्माण में कर रहा है।

भारत और वैश्विक व्यापार पर क्या पड़ेगा असर?

हस्ताक्षर होने के बाद अब पूरी शक्ति राष्ट्रपति ट्रंप के पास है कि वे किस देश पर कितना टैरिफ लागू करते हैं। यदि अमेरिका भारत से होने वाले आयातों पर 100% टैरिफ लगाता है, तो इसका दोहरा असर देखने को मिलेगा:

  • भारतीय निर्यातकों पर दबाव: अमेरिका भारतीय सामानों का एक बड़ा बाजार है। 100% टैरिफ लगने से अमेरिका में भारतीय उत्पाद अत्यधिक महंगे हो जाएंगे, जिससे कपड़ा, फार्मा, आईटी और इंजीनियरिंग उत्पादों के निर्यात को भारी नुकसान हो सकता है।

  • खुद अमेरिका को भी झटका: भारतीय सामान महंगे होने से अमेरिकी घरेलू बाजार में महंगाई (Inflation) का दबाव बढ़ेगा, जिसका खामियाजा अमेरिकी उपभोक्ताओं और कंपनियों को भी भुगतना पड़ेगा।

भारत पहले भी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर स्पष्ट कर चुका है कि देश की ऊर्जा सुरक्षा और 140 करोड़ नागरिकों की जरूरतें उसकी पहली प्राथमिकता हैं। ऐसे में यह देखना होगा कि ट्रंप प्रशासन इस कानून का इस्तेमाल सीधे टैरिफ थोपने के लिए करता है या फिर कूटनीतिक दबाव की रणनीति के तौर पर।