September 15, 2026

टूटने की कगार पर है ब्रिटेन? स्कॉटलैंड, वेल्स और आयरलैंड के नेताओं ने मिलाया हाथ

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दुनिया के बड़े हिस्से पर कभी राज करने वाले यूनाइटेड किंगडम (UK) के सामने अब अपने ही संघ को एकजुट रखने की गंभीर चुनौती खड़ी हो गई है। स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड के प्रमुख राजनीतिक दलों के नेताओं ने कार्डिफ में एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर कर ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ साझा मोर्चा खोल दिया है। इन नेताओं ने दो टूक कहा है कि वेस्टमिंस्टर (ब्रिटिश संसद) का समय अब खत्म हो रहा है और उनका भविष्य यूरोपीय संघ (EU) के साथ जुड़ा हुआ है।

कार्डिफ में हुए इस सम्मेलन में स्कॉटिश नेशनल पार्टी (SNP) के जॉन स्विनी, प्लाइड सिम्रू के रुन अप इओरवर्थ और सिन फेन की मिशेल ओ’नील व मैरी लू मैकडोनाल्ड ने संयुक्त रूप से अपने क्षेत्रों के लिए आत्मनिर्णय के अधिकार की घोषणा की। नेताओं ने प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम की सरकार से नए संवैधानिक बदलावों की तैयारी शुरू करने को कहा है। जॉन स्विनी ने यहां तक दावा कर दिया कि एंडी बर्नहैम यूनाइटेड किंगडम के आखिरी प्रधानमंत्री साबित हो सकते हैं।

समझौते के राजनीतिक मायने: ईयू में वापसी और जनमत संग्रह पर नजर

कार्डिफ में हुआ यह समझौता कानूनी रूप से यूके को सीधे विघटित करने वाला दस्तावेज नहीं है, बल्कि इसे लंदन स्थित केंद्रीय सत्ता पर एक बड़ा राजनीतिक दबाव बनाने का हथियार माना जा रहा है। स्कॉटलैंड में दूसरे स्वतंत्रता जनमत संग्रह की मांग काफी समय से चल रही है। साल 2014 के जनमत संग्रह में भले ही ‘नो’ (अलग न होने) वोट की जीत हुई थी, लेकिन ब्रेक्सिट के बाद से वहां अलग होने के समर्थन में इजाफा देखा गया है।

दूसरी ओर, उत्तरी आयरलैंड में ‘गुड फ्राइडे समझौते’ के तहत सीमा सर्वेक्षण (बॉर्डर पोल) का प्रावधान मौजूद है, जो बहुमत होने पर आयरलैंड गणराज्य के साथ एकीकरण का रास्ता खोलता है। वेल्स में भी प्लाइड सिम्रू के उभार के साथ स्वतंत्रता की मांग ने गति पकड़ी है। तीनों क्षेत्रों के नेताओं का कहना है कि उनकी वास्तविक प्राथमिकताएं यूरोपीय संघ से जुड़ने में हैं।

सदियों के विलय और समझौतों से बना है ब्रिटेन

यूनाइटेड किंगडम का मौजूदा ढांचा सदियों के समझौतों और ऐतिहासिक विलय की देन है:

  • 1536: वेल्स को औपचारिक रूप से इंग्लैंड के साथ जोड़ा गया।

  • 1707: स्कॉटलैंड और इंग्लैंड के बीच ‘एक्ट ऑफ यूनियन’ के तहत ग्रेट ब्रिटेन का गठन हुआ।

  • 1801: आयरलैंड को इस संघ का हिस्सा बनाया गया।

  • 1922: आयरलैंड गणराज्य अलग होकर एक स्वतंत्र राष्ट्र बना, जबकि उत्तरी आयरलैंड यूके में ही रह गया।

आज वही उत्तरी आयरलैंड फिर से आयरलैंड के साथ एकजुट होने की राह तलाश रहा है, जबकि स्कॉटलैंड और वेल्स अपने लिए पूर्ण संप्रभुता की मांग उठा रहे हैं।

अलग हुए तो सिर्फ इंग्लैंड बचेगा, अर्थव्यवस्था और रक्षा पर बड़ा असर

यूनाइटेड किंगडम का कुल क्षेत्रफल लगभग 2.42 लाख वर्ग किलोमीटर और इसकी अर्थव्यवस्था करीब 4.26 ट्रिलियन डॉलर की है। यदि स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड अलग होते हैं, तो संघ में केवल इंग्लैंड बचेगा। इससे देश का भौगोलिक क्षेत्रफल घटकर लगभग आधा रह जाएगा, आबादी का बड़ा हिस्सा अलग हो जाएगा और जीडीपी में भारी गिरावट आएगी।

इसका सबसे बड़ा रणनीतिक असर रक्षा और ऊर्जा क्षेत्र पर पड़ेगा। स्कॉटलैंड के पास उत्तरी सागर के तेल और प्राकृतिक गैस भंडारों का एक बड़ा हिस्सा और महत्वपूर्ण तटीय क्षेत्र है। इसके अलावा, ब्रिटेन का रणनीतिक परमाणु पनडुब्बी बेस ‘फासलेन’ भी स्कॉटलैंड में स्थित है। अगर स्कॉटलैंड अलग होता है, तो इस परमाणु बेस को कहीं और स्थानांतरित करना तकनीकी रूप से बेहद जटिल, खर्चीला और समय लेने वाला होगा, जिससे नाटो (NATO) में ब्रिटेन की सैन्य भूमिका भी प्रभावित होगी।

भू-राजनीतिक हलचल और ब्रिटिश सरकार का रुख

इस अंदरूनी खींचतान का असर वैश्विक कूटनीति पर भी पड़ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में आयरलैंड के एकीकरण के प्रति सकारात्मक संकेत दिए हैं, जिससे वेस्टमिंस्टर पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ गया है।

ब्रिटिश प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम ने संघ के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा है कि सरकार का पूरा ध्यान इस समय महंगाई को नियंत्रित करने और अर्थव्यवस्था को संभालने पर होना चाहिए, न कि संवैधानिक बहसों पर। बर्नहैम ने स्पष्ट किया है कि स्कॉटलैंड में नए जनमत संग्रह की मांग फिलहाल सरकार के एजेंडे में शामिल नहीं है और यह पूरी तरह से “ऑफ लिमिट्स” है।