September 15, 2026

जानिए यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों की पूरी कुंडली, क्यों है सऊदी अरब से पंगा

saudi arab

यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों (Houthi rebels) ने दक्षिण लाल सागर क्षेत्र में अपना प्रभाव तेजी से बढ़ाना शुरू कर दिया है। विद्रोही गुट ने इस इलाके के कई महत्वपूर्ण द्वीपों पर कब्जा कर लिया है, जिससे दक्षिण लाल सागर के प्रमुख समुद्री रूट पर उनकी पकड़ मजबूत हो गई है। हूतियों ने हाल ही में ‘ग्रेटर हनीश’ और ‘लेसर हनीश’ नामक द्वीपों को अपने नियंत्रण में ले लिया है और वे रणनीतिक रूप से अहम बाब अल-मंदेब स्ट्रेट (Bab al-Mandab Strait) के आसपास तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

सऊदी के तेल रूट पर सीधा निशाना

इन द्वीपों पर कब्जे से हूतियों के लिए लाल सागर के रास्ते गुजरने वाले सऊदी अरब के कच्चे तेल के जहाजों को निशाना बनाना बेहद आसान हो गया है। होर्मुज स्ट्रेट में ईरान द्वारा जहाजों को निशाना बनाए जाने के बाद, सऊदी अरब ने एक वैकल्पिक मार्ग के रूप में लाल सागर के रास्ते कच्चा तेल भेजना शुरू किया था।

अब हूती विद्रोही इसी रूट पर सऊदी अरब के ऑयल इंफ्रास्ट्रक्चर और लाल सागर में मौजूद जहाजों पर लगातार हमले कर रहे हैं। इन हमलों का सीधा असर वैश्विक तेल आपूर्ति (Global Oil Supply) और तेल की कीमतों पर पड़ रहा है।

कौन हैं हूती विद्रोही?

हूती विद्रोही गुट को ‘अंसार अल्लाह’ (Ansar Allah) के नाम से भी जाना जाता है, जिसका अर्थ है ‘अल्लाह के समर्थक’। 1990 के दशक में स्थापित हुए इस गुट का यमन के ज्यादातर हिस्सों पर कब्जा है। इनमें यमन की राजधानी सना और सऊदी अरब से सटे पश्चिमी और उत्तरी इलाके शामिल हैं।

यह गुट 2014 में तब दुनिया की नजरों में आया जब इसने यमन सरकार के खिलाफ बगावत कर सत्ता पलट दी थी। इसके बाद यमन में गृह युद्ध शुरू हो गया, जिसके जवाब में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने अमेरिकी समर्थन से हवाई हमले किए। इन हमलों में करीब 9 हजार आम नागरिकों की मौत हुई थी और आज यमन की आधी से ज्यादा आबादी मानवीय सहायता पर निर्भर है।

सऊदी अरब से दुश्मनी की क्या है वजह?

हूती विद्रोही यमन सरकार का समर्थन करने के कारण सऊदी अरब को अपना सबसे बड़ा दुश्मन मानते हैं। ईरान के समर्थन से यह गुट सऊदी नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन के खिलाफ कई सालों से लड़ रहा है। हालांकि, 2022-23 में दोनों पक्षों के बीच एक शांति समझौता हुआ था, लेकिन 2026 में फिर से तनाव बढ़ गया और हूतियों ने सऊदी अरब पर दोबारा मिसाइल और ड्रोन हमले शुरू कर दिए।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पहले यह गुट पूरी तरह ईरान से हथियार हासिल करता था, लेकिन अब यह यमन के भीतर ही अपने हथियार और मिसाइलें तैयार कर रहा है।

अदन से चल रही है यमन सरकार

2014 में हूतियों द्वारा राजधानी सना पर कब्जा किए जाने के बाद से यमन की सरकार अदन से काम कर रही है, जिसे अंतरिम राजधानी घोषित किया गया है। वर्तमान में यमन सरकार के प्रमुख रशाद अल-अलीमी हैं, जिन्होंने 2022 में सत्ता संभाली थी। उनसे पहले राष्ट्रपति अब्द-रब्बू मंसूर हादी सत्ता में थे, जिनके हूतियों के साथ बेहद तनावपूर्ण संबंध रहे थे।