September 15, 2026

कच्चे तेल में भारी उछाल, भारत में 5 रुपये तक महंगा हो सकता है पेट्रोल-डीजल!

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अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में गहराते संकट ने वैश्विक तेल बाजार में हलचल तेज कर दी है। आज 15 सितंबर को ब्रेंट क्रूड का भाव 107 डॉलर प्रति बैरल के करीब ट्रेड कर रहा है। वहीं, भारतीय बास्केट के लिए कच्चे तेल की कीमत 119.69 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। वैश्विक बाजार का यह रुख मार्च 2026 की उस स्थिति की याद दिला रहा है जब कच्चे तेल के दाम 115 डॉलर के पार चले गए थे। अगर अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर यही हालात बने रहे, तो ब्रेंट क्रूड अप्रैल की तरह 126 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक भी पहुंच सकता है।

सऊदी की पाइपलाइन बंद, 2016 के निचले स्तर पर तेल उत्पादन

कच्चे तेल की सप्लाई चेन को मुख्य रूप से दो बड़े झटके लगे हैं। पहला झटका होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हुए हमलों का है। इस रणनीतिक रास्ते पर ईरान ने अपना नियंत्रण कड़ा कर दिया है, जिससे कमर्शियल जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है।

दूसरा बड़ा कारण सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन का बंद होना है। ड्रोन हमलों के बाद सऊदी अरब ने अस्थायी रूप से इस पाइपलाइन को बंद कर दिया है। इसका सीधा असर उत्पादन पर दिखा है। अगस्त में सऊदी का तेल उत्पादन घटकर 6.2 मिलियन बैरल प्रति दिन रह गया है, जो 2016 के बाद से इसका सबसे निचला स्तर है। सप्लाई घटने और बाजार में अनिश्चितता के कारण पिछले ढाई महीनों में ब्रेंट क्रूड के दाम 50% से ज्यादा चढ़ चुके हैं।

ग्लोबल संकट के बीच भारत के लिए ढाल बना रूस

अमेरिकी दबाव और सप्लाई संकट के बीच रूस भारत के लिए एक प्रमुख ऊर्जा विकल्प बना हुआ है। दिल्ली में तैनात रूस के राजदूत डेनिस अलीपोव ने स्पष्ट किया है कि मॉस्को भारत को उसकी जरूरत के मुताबिक कच्चे तेल की सप्लाई जारी रखने के लिए तैयार है। रूस का भी मानना है कि रूसी कच्चे तेल के बिना ग्लोबल एनर्जी मार्केट स्थिर नहीं रह सकता।

वर्तमान में तेल व्यापार में एक नया समीकरण भी देखने को मिल रहा है। यूक्रेन हमलों के कारण रूसी रिफाइनरियां प्रभावित हुई हैं, जिसके चलते भारत रूस से कच्चा तेल खरीदकर उसे रिफाइन कर वापस रूस को ही सप्लाई कर रहा है। CREA की रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त में रूस ने भारत से 1.72 लाख टन रिफाइंड तेल उत्पाद खरीदे थे।

पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर संभावित असर

अंतरराष्ट्रीय बाजार में आई इस तेजी का दबाव भारतीय तेल कंपनियों पर पड़ना शुरू हो गया है। देश में फिलहाल पेट्रोल की रिटेल कीमतें 101 से 116 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमतें 95 से 104 रुपये प्रति लीटर के बीच हैं।

भारतीय तेल कंपनियों के लिए कच्चे तेल की लागत (Indian Basket) 120 डॉलर के करीब पहुंच रही है। अगर बाजार में जल्द स्थिरता नहीं आती है और भारतीय बास्केट का औसत मूल्य 110-120 डॉलर के ऊपर बना रहता है, तो कंपनियों पर मार्जिन का भारी दबाव पड़ेगा। भारत सरकार ने अपनी जनता की जरूरतों को प्राथमिकता देने की बात स्पष्ट की है, लेकिन अगर ब्रेंट क्रूड 120 डॉलर के पार टिका रहता है, तो आने वाले समय में देश में पेट्रोल और डीजल के दामों में 2 से 5 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।