September 15, 2026

‘मछुआरों के वोटों की दलाली करने वालों से सावधान रहें’: डॉ. संजय निषाद

sanjay nishad

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की बढ़ती सरगर्मी के बीच निषाद और मछुआरा वोट बैंक को लेकर सियासी तकरार तेज हो गई है। प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद ने समाज को ‘मौसमी नेताओं’ से सतर्क रहने की नसीहत दी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक पोस्ट के जरिए उन्होंने कहा कि आजादी के बाद पहली बार उत्तर प्रदेश में मछुआरा समुदाय एक बड़ी राजनीतिक ताकत बनकर उभरा है, ऐसे समय में समाज के वोटों की दलाली करने वालों को पहचानने की सख्त जरूरत है।

‘मुंबई में व्यापार या दूसरों की दरी बिछाना’: बिना नाम लिए साधा निशाना

डॉ. संजय निषाद ने किसी का नाम लिए बिना तीखा हमला बोलते हुए कहा कि कुछ मौसमी नेता अब तक यह तय नहीं कर पाए हैं कि उन्हें मुंबई में व्यापार करना है, यहां-वहां घूमकर दूसरों की दरी बिछानी है या मछुआरा समाज के वोटों की दलाली करनी है।

उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बिहार में मछुआरा समुदाय के वोटों की खरीद-बिक्री के लिए बदनाम और वहां समाज के राजनीतिक उभार को नुकसान पहुंचाने वाले लोग अब उत्तर प्रदेश में आकर निषाद समाज को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं।

‘लाल टोपी और नीली वर्दी पहनकर राजनीति सिखाने की कोशिश’

संजय निषाद ने तीखे लहजे में कहा कि जो व्यक्ति खुद एक विधानसभा चुनाव जीतने की हैसियत नहीं रखता, वह जेब में नोटों की गड्डी लेकर लाल टोपी और नीली वर्दी पहनकर यूपी के निषाद समाज को राजनीति सिखाने निकला है।

उन्होंने दो-टूक कहा कि मछुआरा समुदाय पैसों पर बिकने वाली कौम नहीं है। उत्तर प्रदेश के मछुआरों को राजनीति सिखाने से पहले यह समझ लेना चाहिए कि राजनीति और संघर्ष उनके खून में दौड़ता है।

केवट, मल्लाह, बिंद और कश्यप में फूट डालने का आरोप

इतिहास का हवाला देते हुए निषाद पार्टी प्रमुख ने कहा कि मछुआरा समाज ने मुगलों और अंग्रेजों से कड़ा संघर्ष किया और देश की आजादी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। संविधान में समाज को अधिकार और आरक्षण मिले, लेकिन आपसी बिखराव के कारण लंबे समय तक उसका हक लुटता रहा।

उन्होंने कहा कि आज भी केवट, मल्लाह, बिंद और कश्यप के नाम पर भेद पैदा कर समाज को एकजुट होने से रोकने के षड्यंत्र रचे जा रहे हैं।

‘गरीब हैं लेकिन स्वाभिमान का सौदा नहीं करेंगे’

डॉ. निषाद ने समाज के लोगों से अपील की कि वे ऐसे चेहरों को पहचानें जो दूसरे राजनीतिक दलों से पैसा लेकर समाज के बीच बांटते हैं और उनके वोटों का सौदा करते हैं। उन्होंने कहा कि मछुआरा गरीब जरूर है, लेकिन अपने स्वाभिमान और अधिकारों का सौदा किसी भी कीमत पर नहीं करेगा। अपनी पोस्ट के अंत में उन्होंने ‘जय निषादराज’ का नारा लिखा।