September 15, 2026

मांसाहारी टिप्पणी पर बागेश्वर बाबा की सफाई, कहा- खानपान पर आपत्ति नहीं

Dhirendra Shastri

पश्चिम बंगाल में मांसाहारी भोजन और दुर्गा पूजा को लेकर दिए गए बयानों के बाद छिड़े सियासी घमासान के बीच बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने स्कॉटलैंड के ग्लासगो से अपनी स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा है कि उनके बयानों का गलत अर्थ निकाला गया है और वे कभी भी किसी के खानपान या जीवनशैली पर पाबंदी लगाने की बात नहीं करते।

‘दुर्गा पूजा के दौरान पवित्रता बनाए रखने की बात कही थी’

ग्लासगो में मीडिया और भक्तों के बीच बात करते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने कहा, “जैसे ही हम पश्चिम बंगाल से वापस निकले, वहां चर्चाएं तेज हो गईं। हमारी आदत है कि हमने आज तक कभी किसी के खानपान या पहनावे पर कोई टिप्पणी नहीं की है। हां, दुर्गा पूजा की बात थी तो हमने सीधी सी बात कही थी कि पूजा के समय देवी के आसपास पवित्रता बनाए रखी जानी चाहिए। मांस का भक्षण पंडालों के नीचे न किया जाए, जिन्हें खाना है वे अपने घरों में खाएं।”

उन्होंने स्पष्ट किया कि वे भला किसी के भोजन या जीने के अधिकार पर रोक कैसे लगा सकते हैं। लेकिन एक धार्मिक गुरु होने के नाते वे हिंसा और अहिंसा के मार्ग पर बात करने का अधिकार रखते हैं।

बलि प्रथा को लेकर कही यह बात

जीव हिंसा और बलि प्रथा पर खुलकर बोलते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने कहा, “जीव में शिव है और हर जीव को जीने का अधिकार है। हमें बलि प्रथा अच्छी नहीं लगती, हो सकता है कि आपको अच्छी लगे। वह मां कैसी मां है जो किसी बेटे की बलि ले? और अगर बलि मां को खुद लेनी होगी तो वह खुद ले लेगी, आप काटने वाले कौन होते हैं?”

उन्होंने आगे कहा कि कई लोगों ने उनकी बात का ‘अर्थ का अनर्थ’ निकाल दिया और यह प्रचारित किया कि बागेश्वर बाबा बंगालियों को समझा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे खुद को भारत का और स्वामी विवेकानंद तथा स्वामी रामकृष्ण परमहंस का ही अनुयायी मानते हैं, ऐसे में वे अपने ही लोगों के खानपान पर सवाल क्यों उठाएंगे। उन्होंने दोहराया कि उनका विरोध केवल जीव हिंसा और पशु बलि को लेकर है, और शास्त्र आधारित बातों को रखना उनका कर्तव्य है।