September 15, 2026

Su-30MKI में जुड़ेगी रूसी R-37M मिसाइल, 300 KM होगी रेंज

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भारतीय वायुसेना (IAF) अपने प्रमुख लड़ाकू विमान Su-30MKI की लंबी दूरी की हवाई युद्ध क्षमता (BVR) को और घातक बनाने जा रही है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, वायुसेना इस फाइटर जेट के साथ रूसी RVV-BD (R-37M वेरिएंट) एयर-टू-एयर मिसाइल को एकीकृत करने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। करीब 300 किलोमीटर की रेंज और मैक 6 (ध्वनि से 6 गुना तेज) की रफ्तार वाली यह मिसाइल दुश्मन के अहम हवाई ठिकानों को सुरक्षित दूरी से नेस्तनाबूद करने में सक्षम है।

क्यों कहा जाता है ‘AWACS किलर’?

R-37M सामान्य एयर-टू-एयर मिसाइलों से काफी अलग है। इसे खासतौर पर दुश्मन के हाई-वैल्यू एरियल प्लेटफॉर्म्स को निशाना बनाने के लिए डिजाइन किया गया है। इसका मुख्य टारगेट एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल (AEW&C) या AWACS विमान, हवा में ईंधन भरने वाले रिफ्यूलिंग टैंकर और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर (EW) विमान होते हैं। आधुनिक हवाई युद्ध में ये प्लेटफॉर्म दुश्मन को कम्युनिकेशन और सपोर्ट देने का अहम काम करते हैं, जिन्हें यह मिसाइल लंबी दूरी से ही मार गिराने की क्षमता रखती है।

7400 KM प्रति घंटे की हाइपरसोनिक रफ्तार

इस मिसाइल की सबसे बड़ी खासियत इसकी अत्यधिक तेज गति है। यह लगभग 7,400 किलोमीटर प्रति घंटे (मैक 6) की रफ्तार हासिल कर सकती है। टारगेट को सटीकता से भेदने के लिए इसमें इनर्शियल नेविगेशन और एक्टिव रडार होमिंग जैसी उन्नत प्रणालियों का इस्तेमाल किया गया है। इससे Su-30MKI को दुश्मन के लड़ाकू विमानों की पहुंच से काफी दूर रहते हुए अपने लक्ष्य को तबाह करने की सुविधा मिलेगी।

300 मिसाइलों की खरीद और तकनीकी अपग्रेड

रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत करीब 300 R-37M मिसाइलों की संभावित खरीद पर विचार कर रहा है। रूस अपने Su-30SM और Su-35 लड़ाकू विमानों में पहले से ही इसका इस्तेमाल कर रहा है। हालांकि, भारतीय Su-30MKI बेड़े में इसे सीधे तौर पर फिट नहीं किया जा सकता। विमान और मिसाइल के बीच बेहतर तालमेल के लिए इसके मिशन-कंट्रोल सिस्टम, राडार और संबंधित सॉफ्टवेयर में भी जरूरी बदलाव करने होंगे।

HAL करेगा 260+ जेट्स की व्यापक ओवरहॉलिंग

हथियारों के अपग्रेडेशन के साथ ही वायुसेना अपने 260 से अधिक Su-30MKI विमानों के लंबे समय तक संचालन के लिए एक बड़े रखरखाव प्रोजेक्ट पर भी काम कर रही है। रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) इन विमानों के एयरफ्रेम और AL-31 सीरीज के इंजनों की व्यापक ओवरहॉलिंग के प्रस्ताव की समीक्षा कर रही है। इस काम की जिम्मेदारी सरकारी कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को दिए जाने की तैयारी है। ओवरहॉलिंग के तहत विमानों और उनके इंजनों की गहन जांच व मरम्मत की जाएगी। इससे पहले, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भी इन विमानों ने ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल और रैम्पेज जैसे सटीक हथियारों का इस्तेमाल कर अपनी मारक क्षमता का प्रदर्शन किया था।