September 15, 2026

रक्षा क्षेत्र में बड़ा कदम: DAC ने दी 1.10 लाख करोड़ के रक्षा खरीद प्रस्तावों को मंजूरी

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केंद्र सरकार ने रक्षा क्षेत्र और सेनाओं के आधुनिकीकरण की दिशा में 1.10 लाख करोड़ रुपये की सैन्य खरीद को मंजूरी दी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) की बैठक में इन प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई। इस बड़े रक्षा सौदे में थल सेना, नौसेना और वायुसेना तीनों के लिए आधुनिक उपकरण और सैन्य प्रणालियां शामिल हैं। खरीद प्रक्रिया की सबसे खास बात यह है कि कुल मंजूर प्रस्तावों का 98 प्रतिशत हिस्सा सीधे तौर पर भारतीय उद्योगों से खरीदा जाएगा। रक्षा मंत्रालय ने इन प्रस्तावों के लिए ‘एक्सेप्टेंस ऑफ नेसेसिटी’ (AoN) जारी कर दी है, जिसे खरीद प्रक्रिया की प्रारंभिक प्रशासनिक मंजूरी माना जाता है।

थल सेना के लिए CBRN वाहन और ALH की खरीद

थल सेना की मारक और लॉजिस्टिक क्षमता बढ़ाने के लिए कई अहम प्रणालियों को हरी झंडी मिली है। इनमें केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल और न्यूक्लियर (CBRN) रिकॉनिसेंस वाहन शामिल हैं। ये वाहन उन संवेदनशील इलाकों में काम आएंगे जहां रासायनिक, जैविक या परमाणु हथियारों का खतरा हो। प्रभावित क्षेत्रों की पहचान और निगरानी में ये बेहद कारगर साबित होंगे। इसके अलावा हाई मोबिलिटी वाहन, सेल्फ-प्रोपेल्ड मैकेनिकल माइन लेयर्स, एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (ALH), ट्रॉल टैंक और सर्वत्र ब्रिज सिस्टम की खरीद को भी मंजूरी दी गई है। युद्ध के दौरान सैनिकों की सुरक्षित आवाजाही और क्रॉसिंग तैयार करने में ट्रॉल टैंक और सर्वत्र ब्रिज सिस्टम अहम भूमिका निभाएंगे।

नौसेना को मिलेगा ‘अरुध्र रडार’

नौसेना की हवाई निगरानी क्षमता को आधुनिक बनाने के लिए ‘अरुध्र रडार’ (Arudhra Radar) की खरीद प्रस्ताव को पास किया गया है। इन रडारों को विभिन्न नौसैनिक एयर स्टेशनों पर मौजूद पुराने एयर रूट सर्विलांस रडार की जगह स्थापित किया जाएगा। इसके साथ ही मरीन गैस टर्बाइन के डिजाइन, विकास और खरीद के प्रस्ताव को भी मंजूरी मिली है। इससे युद्धपोतों की प्रणोदन प्रणाली (propulsion system) के लिए विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर भारतीय नौसेना की निर्भरता कम होगी।

वायुसेना के इलेक्ट्रॉनिक युद्धक तंत्र में इजाफा

वायुसेना के इलेक्ट्रॉनिक युद्धक तंत्र को मजबूत करने के लिए ग्राउंड-बेस्ड मल्टी-पर्पज जैमर (GBMPJ) और डिफेंस फोर्सेज सिक्योर एक्सेस कार्ड सिस्टम खरीदे जाएंगे। मल्टी-पर्पज जैमर तकनीक दुश्मन के रडार सिस्टम को बाधित करने में सक्षम है, जिससे वायुसेना की इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर क्षमता में सीधा इजाफा होगा।

घरेलू रक्षा उद्योग को संजीवनी

इस रक्षा सौदे का 98 प्रतिशत हिस्सा भारतीय कंपनियों के जरिए पूरा किया जाना है। स्वदेशी रक्षा उत्पादन को गति देने और सैन्य उपकरणों के मामले में विदेशी बाजार पर निर्भरता कम करने के लिहाज से यह रक्षा मंत्रालय का एक महत्वपूर्ण रणनीतिक कदम है।