यूक्रेन का बड़ा फैसला: रूस से जंग के लिए पोर्नोग्राफी को लीगल कर जुटाएगा फंड
KOSTIANTYNIVKA, UKRAINE AUGUST 19: Emergency service workers extinguish a fire following a Russian air strike on a residential building in Kostiantynivka, eastern Ukraine, on August 19, 2025. (Photo by Diego Herrera Carcedo/Anadolu via Getty Images)
रूस के खिलाफ जारी लंबे युद्ध के लिए धन जुटाने के मकसद से यूक्रेन एक बेहद अप्रत्याशित कदम उठाने पर विचार कर रहा है। ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ की रिपोर्ट के अनुसार, यूक्रेनी सरकार एडल्ट एंटरटेनमेंट (Pornography) को लीगल कर इसे देश की कानूनी अर्थव्यवस्था का हिस्सा बनाने की तैयारी कर रही है।
टैक्स से होगी 237 करोड़ रुपये की बंपर कमाई यूक्रेनी संसद की वित्त समिति के अध्यक्ष और सांसद यारोस्लाव झेलेजन्याक द्वारा समर्थित इस बिल के ड्राफ्ट में दावा किया गया है कि एडल्ट इंडस्ट्री को वैध करने से देश को भारी आर्थिक लाभ होगा।
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राजस्व: सरकार को टैक्स के रूप में करीब 2.5 करोड़ डॉलर (लगभग 237 करोड़ भारतीय रुपये) की अतिरिक्त कमाई हो सकती है।
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ड्रोन की खरीद: सांसद झेलेजन्याक के अनुसार, इस टैक्स के पैसे का इस्तेमाल सीधे तौर पर सेना को मजबूत करने के लिए किया जाएगा, जिससे युद्ध के मोर्चे के लिए 30,000 तक नए ड्रोन खरीदे जा सकेंगे।
वर्तमान में 7 साल की सजा का है प्रावधान मौजूदा यूक्रेनी कानूनों के तहत देश में एडल्ट कंटेंट बनाना और उसे वितरित करना पूरी तरह से गैरकानूनी है। इसके लिए 7 साल तक की जेल की सजा का कड़ा प्रावधान है। हालांकि, भ्रष्ट पुलिस और प्रशासनिक मिलीभगत के कारण यह इंडस्ट्री पर्दे के पीछे लगातार फल-फूल रही है।
कंटेंट क्रिएटर्स के सामने कानूनी ‘धर्मसंकट’ हाल ही में यूक्रेन के अधिकारियों ने एडल्ट कंटेंट बनाने वालों की कमाई पर टैक्स लगाना शुरू कर दिया है, जिससे क्रिएटर्स एक अजीब कानूनी पचड़े में फंस गए हैं:
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यदि महिलाएं अपनी इस आय पर टैक्स नहीं देती हैं, तो उन पर टैक्स चोरी का आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाता है।
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यदि वे ईमानदारी से अपनी कमाई घोषित कर टैक्स देती हैं, तो वे स्वयं ही पोर्नोग्राफी कानून तोड़ने का जुर्म कबूल कर लेती हैं।
हाल ही में जिन लोगों ने सरकार को अपनी कमाई की जानकारी दी थी, उन्हें टैक्स चोरी और गैरकानूनी रूप से एडल्ट कंटेंट बनाने के आरोपों वाले नोटिस भेजे गए हैं। सरकार का नया बिल इसी दोहरे संकट को खत्म कर इंडस्ट्री को टैक्स के दायरे में लाने का प्रयास है।
