अमित शाह ने बताया पीएम मोदी के कार्यभार संभालने के बाद क्या बदला
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार (6 सितंबर, 2026) को गोवा के दोना पौला में नशा मुक्त भारत विषय पर आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए देश की आंतरिक सुरक्षा को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की कमान संभाली थी, तब भारत के सामने तीन सबसे बड़ी और विकराल चुनौतियां थीं।
पदभार संभालते वक्त देश के सामने थीं ये 3 बड़ी चुनौतियां केंद्रीय गृह मंत्री ने उन शुरुआती परिस्थितियों को याद करते हुए बताया कि उस समय देश का आंतरिक सुरक्षा ढांचा किन गंभीर समस्याओं से जूझ रहा था:
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जम्मू-कश्मीर: राज्य की स्थिति और वहां लगातार बढ़ता हुआ आतंकवाद।
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नक्सलवाद: देश के कई हिस्सों में फैला नक्सलवादी आतंक।
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उत्तर पूर्व (North-East): पूर्वोत्तर भारत में विभिन्न सशस्त्र समूहों की मौजूदगी, जिसके कारण पूरा क्षेत्र अशांति की चपेट में था।
अमित शाह ने यह भी कहा कि इसके अलावा देश के अलग-अलग हिस्सों में लगातार होने वाले बम धमाकों से आंतरिक सुरक्षा बुरी तरह प्रभावित थी और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर देश भर में बड़े पैमाने पर आंदोलन हो रहे थे। ऐसे कठिन माहौल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की बागडोर संभाली थी।
पीएम मोदी के नेतृत्व में बदली आंतरिक सुरक्षा की तस्वीर गृह मंत्री ने पिछले कुछ वर्षों में सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का जिक्र करते हुए कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में देश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था अभूतपूर्व रूप से मजबूत हुई है।
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जम्मू-कश्मीर: साल 2019 में अनुच्छेद 370 हटने के बाद से वहां अलगाववाद की भावना में भारी कमी आई है। आतंकवाद के आंकड़े अब सिमटकर लगभग शून्य की तरफ बढ़ रहे हैं और घाटी विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रही है।
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नक्सलवाद का खात्मा: पांच दशक पुरानी नक्सल समस्या अब लगभग अतीत बनकर रह गई है। ‘तिरुपति से पशुपतिनाथ’ तक रेड कॉरिडोर बनाने का सपना देखने वाले लोगों ने अब हथियार डालकर मुख्यधारा का रास्ता चुन लिया है।
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पूर्वोत्तर में शांति: पूर्वोत्तर भारत में भी लगभग 10,000 युवाओं ने हथियार छोड़े हैं। भारत सरकार ने वहां 14 से अधिक ऐतिहासिक समझौते किए हैं, जिससे आज पूरा पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास और शांति की राह पर अग्रसर है।
