September 15, 2026

झीरम घाटी नक्सल हमला: जगदलपुर NIA कोर्ट ने 10 आरोपियों को ठहराया दोषी

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छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित 2013 के झीरम घाटी नक्सल हमले में जगदलपुर एनआईए (NIA) की स्पेशल कोर्ट ने शनिवार (4 सितंबर) को 10 आरोपियों को दोषी ठहराया है। करीब 13 साल बाद आए इस ऐतिहासिक फैसले में अदालत ने 101 गवाहों के बयानों और पुख्ता सबूतों के आधार पर यह अहम कदम उठाया है।

अदालत ने दोषियों को फिलहाल सजा नहीं सुनाई है। स्पेशल कोर्ट ने दोषियों की सजा की अवधि तय करने के लिए 16 सितंबर 2025 की तारीख सुरक्षित रखी है।

टीएस सिंह देव ने सुरक्षा चूक पर उठाए सवाल कोर्ट के फैसले पर छत्तीसगढ़ के पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंह देव ने असंतुष्टि जताते हुए पूरी घटना की प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि वह तब तक संतुष्ट नहीं हैं, जब तक यह तय नहीं हो जाता कि उस समय यह घटना कैसे होने दी गई थी।

सिंह देव ने कहा कि इन लोगों ने हमले को अंजाम दिया, यह एक अलग बात है, लेकिन पूरा इलाका बिल्कुल खाली कैसे छोड़ दिया गया था। उन्होंने प्रशासन की कार्यशैली पर सीधा निशाना साधते हुए पूछा कि पूरी जानकारी होने के बावजूद सुरक्षा के इंतजाम क्यों नहीं किए गए। उनके मुताबिक, इस पूरे मामले में असल गलती प्रशासन की है और सबसे जरूरी बात जवाबदेही तय करना है।

पूर्व डिप्टी सीएम ने यह भी रेखांकित किया कि जब मौके पर विपक्ष के बड़े नेता, पूर्व केंद्रीय मंत्री और पार्टी अध्यक्ष, जो पहले देश के गृहमंत्री भी रह चुके थे, मौजूद थे, तो उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना किसकी जिम्मेदारी थी।

25 मई 2013 का वह खौफनाक दिन यह भीषण नक्सली हमला 25 मई 2013 को बस्तर जिले के दरभा थाना क्षेत्र स्थित झीरम घाटी में हुआ था। उस समय राज्य में विधानसभा चुनाव नजदीक थे और कांग्रेस के नेताओं का काफिला सुकमा से जगदलपुर की ओर ‘परिवर्तन यात्रा’ के तहत लौट रहा था।

झीरम घाटी के पास पहले से घात लगाकर बैठे सैकड़ों भारी हथियारों से लैस नक्सलियों ने कांग्रेस नेताओं के काफिले को चारों तरफ से घेर लिया। नक्सलियों ने पहले बारूदी सुरंग में विस्फोट किया और उसके बाद अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। इस निर्मम हमले में 32 लोगों की हत्या कर दी गई थी, जिसमें छत्तीसगढ़ कांग्रेस का लगभग पूरा शीर्ष नेतृत्व एक साथ खत्म हो गया था।