September 15, 2026

सऊदी अरब का तेल निर्यात 9 साल के निचले स्तर पर: होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने और यमन की नाकेबंदी से इकोनॉमी को झटका

saudi arab

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे सैन्य संघर्ष के कारण पश्चिम एशिया में गहराए ऊर्जा संकट का सीधा असर अब सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने और यमन द्वारा लाल सागर में की गई सख्त नाकेबंदी के चलते सऊदी अरब का कच्चा तेल निर्यात पिछले 9 वर्षों के सबसे निचले स्तर पर लुढ़क गया है।

अगस्त में निर्यात गिरकर 3 मिलियन बैरल प्रतिदिन पर आया डेटा एनालिटिक्स फर्म्स ‘केप्लर’ (Kpler) और ‘वोर्टेक्सा’ (Vortexa) के आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त महीने में सऊदी अरब का क्रूड शिपमेंट औसतन लगभग 3 मिलियन बैरल प्रति दिन (bpd) दर्ज किया गया। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, शुरुआती 2017 के बाद से यह किसी भी महीने का सबसे निचला स्तर है।

  • लाल सागर के यान्बु पोर्ट पर भारी गिरावट: जो बंदरगाह पहले तेल निर्यात का प्रमुख विकल्प बने थे, वे भी अब युद्ध की चपेट में आ गए हैं। लाल सागर स्थित यान्बु (Yanbu) बंदरगाह से होने वाला शिपमेंट जो जून में 4.3 मिलियन bpd था, वह जुलाई में गिरकर 3.7 मिलियन bpd और अगस्त में घटकर मात्र 2.25 मिलियन bpd रह गया है।

  • बढ़ती लागत और खरीदारों की दूरी: सऊदी तेल ले जाने वाले टैंकरों पर लगातार हो रहे हमलों के कारण अंतरराष्ट्रीय खरीदार सहम गए हैं। कई जहाजों ने सऊदी टर्मिनलों से तेल लोड करने से इनकार कर दिया है, जिसके चलते अब अफ्रीका के रास्ते लंबे और महंगे रूट अपनाने पड़ रहे हैं।

8 अरब डॉलर का कर्ज लेने की तैयारी में सऊदी अरब तेल से होने वाली कमाई में आई भारी गिरावट के चलते सऊदी अरब पर आर्थिक दबाव काफी बढ़ गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, देश की अर्थव्यवस्था पर पड़े इस युद्धकालीन प्रभाव से निपटने के लिए रियाद अब कम से कम 8 अरब डॉलर का नया कर्ज (Loan) लेने की योजना बना रहा है।

यमन की नाकेबंदी और दशकों पुराना संघर्ष सऊदी अरब द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य का विकल्प तलाशने के बाद यमन के सशस्त्र बलों ने लाल सागर में सऊदी शिपिंग के खिलाफ प्रभावी नाकेबंदी लागू कर दी थी। यमन का यह कदम सऊदी नीत गठबंधन द्वारा पिछले कई सालों से यमन पर थोपे गए विनाशकारी और क्रूर नाकेबंदी के जवाब में उठाया गया है। संयुक्त राष्ट्र ने इस मानवीय संकट को दुनिया का सबसे बड़ा मानवीय संकट करार दिया था, जिसमें भोजन, ईंधन और दवाइयों की आपूर्ति बाधित हुई थी। अब यमन की ओर से ड्रोन और मिसाइलों जैसी उन्नत सामरिक क्षमताओं का उपयोग कर सऊदी शासन को सीधे आर्थिक और सैन्य मोर्चे पर चुनौती दी जा रही है।