September 16, 2026

‘हवा में BJP नहीं हारेगी’, इमरान मसूद ने सपा को दिया अल्टीमेटम! सीट शेयरिंग पर बोले

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उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच गठबंधन की सुगबुगाहट तेज हो गई है। इसी बीच सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने विपक्षी एकजुटता और रणनीति को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने दो टूक कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) को हराना आसान नहीं है और केवल बातों या हवा में उसे नहीं हराया जा सकता। उन्होंने गठबंधन का रोडमैप जल्द तय कर तुरंत चुनावी मैदान में उतरने की वकालत की है।

‘बीजेपी को हराना आसान नहीं, तुरंत मैदान में निकलना जरूरी’ सांसद इमरान मसूद ने साफ शब्दों में कहा कि विपक्ष को समय रहते सक्रिय होना होगा ताकि बीजेपी बढ़त न बना सके:

  • त्वरित निर्णय की जरूरत: “मेरा काम करने का तरीका सीधा और स्पष्ट है—लड़ाई ऐसी होनी चाहिए जिसका ठोस नतीजा निकले। जो भी फैसला लेना है, उसे तुरंत फाइनल करके हमें जमीन पर निकलना चाहिए।”
  • पार्टी का अस्तित्व भी प्राथमिकता: “हम चाहते हैं कि उत्तर प्रदेश में भाजपा हारे, लेकिन हम यह भी चाहते हैं कि यूपी में हमारी पार्टी भी सरवाइव करे और यह हमारा बुनियादी अधिकार है।”
  • हवा-हवाई दावों से सचेत रहने की सलाह: उन्होंने दोहराया कि पूरे देश में राहुल गांधी के नेतृत्व में एक माहौल जरूर बना है, लेकिन जमीनी स्तर पर मजबूत तैयारी के बिना बीजेपी को मात देना संभव नहीं है।

सपा पर ज्यादा सीटों का दबाव और कांग्रेस का दावा राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इमरान मसूद का यह बयान सीधे तौर पर समाजवादी पार्टी के साथ सीट-शेयरिंग के फॉर्मूले को साधने की रणनीति का हिस्सा है:

  • सम्मानजनक हिस्सेदारी की मांग: भले ही दोनों दलों के बीच आधिकारिक सीट-बंटवारे की बातचीत अभी शुरू नहीं हुई है, लेकिन कांग्रेस इस बार किसी भी हाल में कम सीटों पर समझौता करने के मूड में नहीं है। चर्चा है कि पार्टी 50-50 फॉर्मूले या बड़ी संख्या में सीटों की मांग रख सकती है।
  • बदली हुई राजनीतिक स्थिति: वर्तमान में उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के 6 सांसद हैं। हाल के दिनों में राहुल गांधी की सक्रियता और जमीन पर कार्यकर्ताओं के बढ़े उत्साह के चलते पार्टी खुद को पहले से अधिक मजबूत मान रही है।
  • अखिलेश यादव पर दबाव: कांग्रेस के इस आक्रामक रुख से सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर गठबंधन के भीतर सहयोगियों को अधिक सीटें देने का राजनीतिक दबाव बढ़ना तय माना जा रहा है।