राम मंदिर में CEO की नियुक्ति पर बोले बृजभूषण शरण सिंह- ‘संतों के बस का नहीं है हिसाब-किताब रखना, निगरानी बेहद जरूरी’
अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा भारतीय वायुसेना के रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को मंदिर का पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किए जाने पर राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है। इस बीच भारतीय जनता पार्टी के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने इस फैसले का समर्थन करते हुए बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यह प्रशासनिक बदलाव पहले ही हो जाना चाहिए था, क्योंकि मंदिर के वित्तीय प्रबंधन और व्यवस्था के लिए जवाबदेही और जिम्मेदारी तय करना बेहद जरूरी है।
‘हिसाब-किताब रखना हर किसी के बस की बात नहीं’ मीडिया से बातचीत करते हुए बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि संत समाज का काम पूजा-पाठ और धार्मिक कार्य करना है, लेकिन मंदिर का भारी-भरकम हिसाब-किताब रखना हर किसी के बस की बात नहीं होती है। उन्होंने खुलकर अपनी बात रखते हुए कहा, “संत दूसरे काम तो कर सकते हैं, लेकिन हिसाब-किताब रखना और वित्तीय प्रबंधन संभालना उनके दायरे का काम नहीं है। इसीलिए उन पर देख-रेख और निगरानी होनी चाहिए।” उन्होंने इस नियुक्ति को प्रशासनिक पारदर्शिता के लिहाज से एक सही कदम बताया है।
चंदे में गड़बड़ी के बाद ट्रस्ट ने उठाया बड़ा कदम गौरतलब है कि अयोध्या राम मंदिर में दान और चंदे में कथित गड़बड़ी के मामले सामने आने के बाद से ही मंदिर के प्रशासनिक और वित्तीय ढांचे में बड़े बदलाव के कयास लगाए जा रहे थे। श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ रही भारी भीड़ और प्रबंधन को चुस्त-दुरुस्त करने के लिए ट्रस्ट ने बुधवार (2 सितंबर) को हुई अहम बैठक में यह बड़ा फैसला लिया।
5,585 आवेदनों में से शॉर्टलिस्ट किए गए तीन उम्मीदवारों में से रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा के नाम पर मुहर लगाई गई। नए CEO के सामने मंदिर की सुरक्षा, सुगम दर्शन व्यवस्था, कर्मचारी प्रबंधन और दान-पुण्य के पैसों की पारदर्शी निगरानी जैसी बड़ी जिम्मेदारियां होंगी।
गोविंददेव गिरि को मिली महासचिव की जिम्मेदारी प्रशासनिक बदलावों की इस कड़ी में ट्रस्ट ने स्वामी गोविंददेव गिरि को महासचिव की अहम जिम्मेदारी सौंपी है। इसके अलावा, न्यास में खाली चल रहे तीन पदों पर महेश भागचंदका, मदन मोहन पांडे और डॉ. निर्मला यादव को नए ट्रस्टी के रूप में शामिल किया गया है। जानकारों का मानना है कि इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य मंदिर के कामकाज को अधिक पेशेवर, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है।
