September 15, 2026

कांग्रेस की 7 सितंबर से मुजफ्फरनगर से किसान यात्रा, 2027 चुनाव की तैयारी

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लखनऊ : उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी बिसात अभी से बिछने लगी है। राज्य में अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन वापस पाने की कोशिश में जुटी कांग्रेस ने अब किसानों पर दांव खेलने का फैसला किया है। किसानों के बीच अपनी पैठ मजबूत करने के लिए पार्टी की किसान इकाई आगामी 7 सितंबर से एक राज्यव्यापी ‘किसान यात्रा’ की शुरुआत करने जा रही है।

इस यात्रा का आगाज पश्चिमी यूपी के मुजफ्फरनगर से होगा। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश से शुरू होकर यह यात्रा पूर्वांचल के अलग-अलग जिलों तक का सफर तय करेगी।

किसानों के मुद्दों को राजनीति के केंद्र में लाने की तैयारी

कांग्रेस का यह साफ मानना है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में सत्ता की चाबी किसानों के पास ही है। ऐसे में पार्टी खेती-किसानी से जुड़े अहम मुद्दों को राजनीतिक चर्चा के केंद्र में लाकर सीधा संवाद स्थापित करना चाहती है।

इस ‘किसान यात्रा’ के दौरान कांग्रेस जिन प्रमुख समस्याओं को उठाने जा रही है, उनमें सबसे ऊपर है:

  • MSP की गारंटी: न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के लिए कानूनी गारंटी की पुरानी मांग को फिर से हवा दी जाएगी।

  • गन्ना बकाया भुगतान: पश्चिमी यूपी के गन्ना बेल्ट में किसानों के बकाया भुगतान में हो रही देरी को एक बड़ा मुद्दा बनाया जाएगा। पार्टी का आरोप है कि समय पर पैसा न मिलने से किसान भारी आर्थिक परेशानी झेल रहे हैं।

बढ़ती लागत और छुट्टा पशुओं पर सरकार को घेरेगी कांग्रेस

किसानों की आमदनी दोगुनी करने के सरकारी दावों के उलट, कांग्रेस खेती की बढ़ती लागत को प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाने की रणनीति पर काम कर रही है।

पार्टी का तर्क है कि डीएपी खाद, बीज, कीटनाशक दवाइयों और बिजली के महंगे होने से किसानों की कमर टूट गई है। वे अधिक पैसा खर्च करने के बावजूद मुनाफे से दूर हैं। इसके साथ ही, छुट्टा पशुओं की समस्या को भी यात्रा में जोरदार तरीके से उठाया जाएगा। कांग्रेस का आरोप है कि राज्य सरकार की नाकामी के चलते आज किसान अपनी फसलों को बचाने के लिए रात-रात भर खेतों में जागने को मजबूर हैं।

गांव-गांव और खेतों में सजेंगी ‘किसान चौपाल’

इस यात्रा का उद्देश्य केवल बड़े शहरों या कस्बों में रैलियां करना नहीं है। अभियान के दौरान कांग्रेस नेता सीधे गांवों और खेतों तक पहुंचेंगे, जहां ‘किसान चौपाल’ का आयोजन किया जाएगा। इन चौपालों के जरिए कांग्रेस के नेता सीधे किसानों से रूबरू होंगे, उनकी शिकायतें सुनेंगे और जमीनी स्तर पर संगठन के ढांचे को मजबूत करेंगे।

चुनाव से पहले कांग्रेस का नया समीकरण

उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से हाशिए पर पड़ी कांग्रेस अब अपने पुराने वोट बैंक को वापस लाने की जद्दोजहद में है। दलित अधिकारों के साथ-साथ अब पार्टी किसानों के मुद्दों को भी आक्रामक तरीके से उठाकर एक नया राजनीतिक समीकरण बनाने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस की रणनीति साफ है—चुनावी माहौल पूरी तरह से गर्म होने से पहले किसानों के सवालों को राजनीति के केंद्र में लाया जाए और सत्ताधारी भाजपा सरकार पर सीधा दबाव बनाया जाए।