अलीगंज में BJP की हैट्रिक या सपा की वापसी? जानें 2027 का सियासी गणित
एटा: उत्तर प्रदेश के एटा जिले की अलीगंज विधानसभा सीट राज्य की एक बेहद चर्चित और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सीट है। एटा लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली इस सीट पर पिछले दो विधानसभा चुनावों (2017 और 2022) से भारतीय जनता पार्टी (BJP) का कब्जा रहा है, जबकि समाजवादी पार्टी (SP) यहां अपनी पुरानी पकड़ को दोबारा मजबूत करने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है। 2022 के चुनाव में यहां जीत-हार का अंतर बहुत ही कम रहा था, जिसके चलते 2027 के चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी अभी से तेज हो गई है।
पिछले चुनावों में अलीगंज सीट का कब्जा
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2022: सत्यपाल सिंह राठौर (BJP) – 1,02,873 वोट
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2017: सत्यपाल सिंह राठौर (BJP) – 88,695 वोट
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2012: रामेश्वर सिंह यादव (SP) – 91,141 वोट
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2007: अवधपाल सिंह यादव (BSP) – 57,149 वोट
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2002: रामेश्वर सिंह यादव (SP) – 44,045 वोट
पिछले चुनावों के मत परिणाम
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2022 चुनाव: बीजेपी के सत्यपाल सिंह राठौर ने समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता रामेश्वर सिंह यादव को महज 3,810 वोटों के करीबी अंतर से हराया था। सत्यपाल सिंह को 1,02,873 वोट और रामेश्वर सिंह को 99,063 वोट मिले थे। तीसरे स्थान पर बसपा के सऊद अली खान (जुनैद मियां) रहे थे।
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2017 चुनाव: बीजेपी के सत्यपाल सिंह राठौर ने सपा के रामेश्वर सिंह यादव को 13,851 वोटों के अंतर से हराकर इस सीट पर पहली बार कमल खिलाया था।
अलीगंज सीट का सामाजिक और जातीय समीकरण अलीगंज का चुनावी ताना-बाना मुख्य रूप से यादव बनाम गैर-यादव ओबीसी (OBC) की राजनीति के इर्द-गिर्द घूमता है:
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यादव और मुस्लिम मतदाता: यादव मतदाता इस क्षेत्र में प्रभावशाली होने के साथ-साथ समाजवादी पार्टी का पारंपरिक और मजबूत आधार माने जाते हैं। मुस्लिम वोटों के साथ मिलकर यह समीकरण सपा को कड़ी ताकत देता है।
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गैर-यादव ओबीसी और सवर्ण: बीजेपी की लगातार दो जीतों के पीछे शाक्य, लोधी, पाल, और कुशवाहा जैसे गैर-यादव ओबीसी समुदायों के साथ-साथ ब्राह्मण, ठाकुर और अनुसूचित जाति (SC) के मतदाताओं की एकजुटता का बड़ा हाथ रहा है।
2027 में क्या रहेगा सियासी माहौल? आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के सामने अपनी इस जीत के सिलसिले को बरकरार रखते हुए ‘हैट्रिक’ लगाने की चुनौती होगी। वहीं, समाजवादी पार्टी 2022 की बेहद करीबी हार को जीत में बदलने के लिए रणनीतिक तैयारी कर रही है। चूंकि जीत का मार्जिन बहुत कम रहा है, इसलिए छोटे सामाजिक समूहों का रुख, उम्मीदवारों का चयन और स्थानीय मुद्दे इस सीट के अंतिम चुनावी नतीजों की दिशा तय करेंगे।
