जलेसर विधानसभा 2027: BJP का गढ़ या सपा की वापसी? जानें सियासी गणित
एटा: उत्तर प्रदेश के एटा जिले की जलेसर विधानसभा सीट राज्य की राजनीतिक रूप से बेहद अहम और संवेदनशील सीटों में गिनी जाती है। यह सीट अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित है। पिछले कुछ विधानसभा चुनावों के आंकड़ों पर नजर डालें तो यहां मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी (BJP) और समाजवादी पार्टी (SP) के बीच ही देखने को मिला है। साल 2022 के पिछले चुनाव में बीजेपी ने बेहद करीबी अंतर से इस सीट पर कब्जा जमाया था, ऐसे में 2027 के चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी अभी से तेज हो गई है।
पिछले चुनावों के नतीजे और कड़ा मुकाबला
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2022 चुनाव: बीजेपी के संजीव कुमार ने 91,339 वोट पाकर सपा के रणजीत सुमन (86,898 वोट) को महज 4,441 वोटों के बेहद मामूली अंतर से हराया था। बसपा के आकाश सिंह 19,364 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे थे।
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2017 चुनाव: बीजेपी के संजीव कुमार दिवाकर ने 81,502 (44.43%) वोट हासिल कर जीत दर्ज की थी, जबकि सपा के रणजीत सुमन को 61,694 वोट मिले थे। इस बार बीजेपी ने करीब 20 हजार वोटों की बढ़त बनाई थी।
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2012 चुनाव: सपा के रणजीत सुमन ने 55,391 वोट पाकर जीत हासिल की थी, जबकि बसपा के ओमप्रकाश दलित दूसरे स्थान पर रहे थे।
जलेसर सीट का सियासी इतिहास जलेसर सीट के पुराने चुनावी परिणामों का इतिहास बताता है कि यहां किसी एक दल का स्थायी वर्चस्व नहीं रहा है। मतदाता लगातार बदलते रुख के साथ अलग-अलग दलों को चुनते आए हैं:
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1996: मिथलेश कुमारी (BJP)
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2002: अनार सिंह दिवाकर (SP)
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2007: कुंवर सिंह (BJP)
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2012: रणजीत सुमन (SP)
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2017: संजीव कुमार दिवाकर (BJP)
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2022: संजीव कुमार (BJP)
जलेसर का सामाजिक और जातीय समीकरण अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित इस सीट पर विभिन्न जातियों की संख्या चुनावी नतीजों में निर्णायक भूमिका निभाती है:
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यादव और दलित: चुनावी विश्लेषण के मुताबिक, इस क्षेत्र में यादव और दलित मतदाताओं की संख्या लगभग 70-70 हजार के आसपास है, जो सबसे महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
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अन्य जातियां: इसके अलावा क्षत्रिय (लगभग 37 हजार), मुस्लिम (लगभग 30 हजार), लोधी (लगभग 25 हजार) और बघेल (लगभग 23 हजार) मतदाता भी यहां चुनावी समीकरण को प्रभावित करने की पूरी क्षमता रखते हैं।
2027 में क्या रहेगा सियासी माहौल? साल 2022 के चुनाव में बीजेपी और सपा के बीच हार-जीत का अंतर सिर्फ 4,441 वोटों का रहा था, जो यह साबित करता है कि जलेसर में मुकाबला बेहद कांटें का होता है। आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के सामने अपनी इस जीत को बरकरार रखने की चुनौती होगी, वहीं समाजवादी पार्टी पिछले नतीजों से सीख लेते हुए इस सीट पर वापसी करने के लिए पूरी ताकत झोंकेगी। स्थानीय मुद्दे, उम्मीदवारों की व्यक्तिगत छवि और सटीक जातीय गोलबंदी ही यह तय करेगी कि 2027 में जलेसर की जनता का ताज किसके सिर पर सजता है।
