August 24, 2026

7 साल बाद भारत आएंगे चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, BRICS समिट में 400 अधिकारियों के साथ लेंगे हिस्सा

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नई दिल्ली: भारत और चीन के बीच लंबे समय से जारी तनाव के बीच एक बड़ी कूटनीतिक खबर सामने आई है। सात साल के बड़े अंतराल के बाद चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग एक बार फिर भारत दौरे पर आ रहे हैं। सूत्रों के हवाले से मिली पुख्ता जानकारी के मुताबिक, शी जिनपिंग अगले महीने नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में शिरकत करेंगे। साल 2020 में हुई हिंसक सीमा झड़प के बाद से दोनों देशों के रिश्तों में आई भयंकर कड़वाहट के बीच इस उच्च स्तरीय दौरे को द्विपक्षीय संबंधों में सुधार के एक नए संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

400 अधिकारियों का होगा जंबो प्रतिनिधिमंडल
इस अहम दौरे के लिए चीन की तरफ से बड़े पैमाने पर तैयारियां की जा रही हैं। बताया जा रहा है कि शी जिनपिंग के साथ लगभग 400 अधिकारियों का एक विशाल प्रतिनिधिमंडल भारत आएगा। इससे पहले साल 2019 में जब शी भारत आए थे, तब उनके साथ 200 से भी कम अधिकारी मौजूद थे। मामले की सीधी जानकारी रखने वाले भारतीय सूत्रों के अनुसार, चीनी अधिकारी इस दौरे को लेकर राजधानी के होटलों की बुकिंग और सुरक्षा प्रोटोकॉल को अंतिम रूप देने में पूरी तरह से व्यस्त हैं।

सीमा विवाद सुलझाने पर टिकी होंगी नजरें
इस शिखर सम्मेलन के दौरान दुनिया भर की नजरें इस बात पर टिकी होंगी कि बीजिंग और नई दिल्ली सीमा विवाद को लेकर क्या साझा रुख अपनाते हैं। दशकों से शांत रही हिमालयी सीमा पर 2020 की हिंसक झड़पों के बाद से हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए थे। हालांकि, सेनाओं के पीछे हटने के हालिया समझौते (डिसइंगेजमेंट पैक्ट) के साथ यह सैन्य गतिरोध कुछ कम हुआ है। इसी बीच भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल भी सीमा विवाद पर अहम बातचीत के लिए बीजिंग में चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ बैठक कर रहे हैं।

ब्रिक्स को मजबूत करने की साझा वैश्विक रणनीति
भले ही भारत और चीन एशिया में एक-दूसरे के कड़े रणनीतिक प्रतिद्वंद्वी हैं, लेकिन वैश्विक मंच पर दोनों के हित कई जगह मिलते हैं। विशेषकर अमेरिकी व्यापार नीतियों के दबाव के कारण दोनों देश ब्रिक्स को एक मजबूत ढाल के रूप में देखते हैं। चीनी विदेश मंत्रालय ने भी स्पष्ट किया है कि चीन ब्रिक्स सहयोग को अत्यधिक महत्व देता है और भारत की अध्यक्षता में इस सम्मेलन की सफलता का पूर्ण समर्थन करता है। शी जिनपिंग का इस सम्मेलन में शामिल होना इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि कोई भी देश बाहरी दबाव के कारण इस बड़े मंच को कमजोर नहीं पड़ने देना चाहता।