August 24, 2026

त्योहारी सीजन से पहले चीनी के बढ़ते दामों पर लगेगी लगाम, केंद्र सरकार के इस फैसले से मिलेगी बड़ी राहत

sugar

नई दिल्ली: त्योहारों का सीजन नजदीक आते ही आम आदमी की जेब पर महंगाई की मार पड़ने लगी है। मिठाइयों की मिठास बढ़ाने वाली चीनी की कीमतों में अचानक भारी उछाल आया है, जिसने लोगों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। बीते एक महीने के भीतर ही खुदरा और थोक बाजार में चीनी के दाम आसमान छूते हुए 60 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं। इस बढ़ती महंगाई पर लगाम कसने और आम जनता को राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने तुरंत हरकत में आते हुए एक बड़ा और अहम कदम उठाया है।

सरकार का बड़ा फैसला, ड्यूटी-फ्री आयात को दी मंजूरी
चीनी की कीमतों को बेकाबू होने से रोकने के लिए केंद्र सरकार ने 20 अगस्त को 10 लाख टन कच्ची चीनी के ड्यूटी-फ्री आयात को हरी झंडी दे दी है। हालांकि, इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) ने स्थिति साफ करते हुए कहा है कि देश में चीनी की कोई किल्लत नहीं है। इस्मा के अध्यक्ष नीरज शिरगांवकर के अनुसार, एक अगस्त तक देश में साढ़े तीन महीने का पर्याप्त स्टॉक मौजूद था। उनका कहना है कि सरकार का यह फैसला किसी कमी को दूर करने के लिए नहीं, बल्कि बाजार में सट्टेबाजी को खत्म करने और सप्लाई चेन को और अधिक मजबूत बनाने के लिए उठाया गया एक एहतियाती कदम है।

जमाखोरी ने बढ़ाई आम आदमी की मुसीबत
बाजार में चीनी की कीमतों में इस अचानक आई तेजी के पीछे सबसे बड़ी वजह सटोरियों द्वारा की जा रही जमाखोरी को माना जा रहा है। इसके अलावा, पिछले कुछ समय में खराब मौसम के कारण भी उत्पादन पर हल्का असर पड़ा है। हालांकि, नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज (NFCSF) के अध्यक्ष प्रकाश नाइकनवरे ने जनता को आश्वस्त किया है कि घरेलू बाजार में चीनी की सप्लाई पूरी तरह से पर्याप्त है। आगामी 2025-26 सीजन के लिए 279 लाख टन चीनी उत्पादन का अनुमान है। देश में हर महीने करीब 22 लाख टन चीनी की खपत होती है, ऐसे में नई पेराई शुरू होने तक बाजार में पुराना स्टॉक पर्याप्त मात्रा में मौजूद रहेगा।

ब्राजील से आएगा स्टॉक, तटीय राज्यों को मिलेगा पहला फायदा
आयात के मोर्चे पर फिलहाल ब्राजील ही भारत के लिए एकमात्र सबसे बड़ा विकल्प है, क्योंकि थाईलैंड खुद चीनी के संकट से जूझ रहा है। उम्मीद जताई जा रही है कि ब्राजील से 15 अक्टूबर से पहले चीनी की कुछ खेप भारतीय बंदरगाहों पर पहुंच जाएगी। आयातित चीनी का सबसे पहला फायदा महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, गुजरात और आंध्र प्रदेश जैसे समुद्री तट वाले राज्यों को मिलेगा। इसके बाद उत्तर भारतीय राज्यों में इसे सड़क और रेल मार्ग के जरिए सुगमता से पहुंचाया जाएगा, ताकि त्योहारी सीजन में आम आदमी को महंगी चीनी से पूरी तरह राहत मिल सके।