बंगाल उपचुनाव में सियासी ट्विस्ट: बेटे के लिए प्रचार नहीं करेंगे AJUP प्रमुख हुमायूं कबीर
पश्चिम बंगाल में नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव से ठीक पहले राज्य की सियासत में एक अप्रत्याशित घटनाक्रम सामने आया है। आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के प्रमुख हुमायूं कबीर ने घोषणा की है कि वे रेजीनगर सीट पर चुनाव प्रचार नहीं करेंगे। यह फैसला इसलिए भी चौंकाने वाला माना जा रहा है क्योंकि इस सीट से खुद उनके बेटे गुलाम नबी आजाद पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार के तौर पर मैदान में हैं।
बेटे की उम्मीदवारी के बावजूद प्रचार से बनाई दूरी
रेजीनगर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव में AJUP ने हुमायूं कबीर के बेटे गुलाम नबी आजाद को अपना प्रत्याशी बनाया है। आमतौर पर पार्टी सुप्रीमो अपने परिजनों और पार्टी प्रत्याशियों के लिए पूरी ताकत झोंकते हैं, लेकिन हुमायूं कबीर ने चुनाव मैदान में सीधे तौर पर उतरने से इनकार कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे रेजीनगर में जमीनी स्तर पर किसी भी चुनावी सभा या जनसंपर्क अभियान में हिस्सा नहीं लेंगे।
पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप
चुनाव प्रचार से खुद को अलग करने के पीछे हुमायूं कबीर ने स्थानीय पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली को मुख्य वजह बताया है। कबीर ने आरोप लगाया कि पुलिस जानबूझकर उनकी पार्टी ‘आम जनता उन्नयन पार्टी’ के कार्यकर्ताओं को निशाना बना रही है।
उन्होंने दावा किया कि चुनावी माहौल के बीच पार्टी कार्यकर्ताओं को बेवजह परेशान किया जा रहा है और उनकी गिरफ्तारियां की जा रही हैं। हुमायूं कबीर के मुताबिक, प्रशासनिक दबाव और उत्पीड़न के इसी रवैये के विरोध स्वरूप उन्होंने चुनाव प्रचार से दूर रहने का फैसला लिया है।
नंदीग्राम के साथ रेजीनगर पर भी टिकीं निगाहें
पश्चिम बंगाल में एक तरफ जहां नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव को लेकर तृणमूल कांग्रेस, भाजपा और कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला और सियासी बयानबाजी देखने को मिल रही है, वहीं दूसरी तरफ मुर्शिदाबाद की रेजीनगर सीट पर भी चुनावी सरगर्मी तेज है। ऐसे में मतदान से ऐन पहले एजेयूपी प्रमुख का प्रचार से हटना रेजीनगर सीट पर मुकाबले के समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।
