September 15, 2026

ईरानी शादी समारोह पर गिराए गए बम, ट्रंप के बयानों पर खड़े हुए बड़े सवाल

President Trump Holds Press Conference At The White House

अमेरिका भले ही दुनिया भर में अपनी खुफिया ताकत और अत्याधुनिक हथियारों का ढिंढोरा पीटता हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। यूएस नेवी के गाइडेड बम कभी ईरान की सेना को निशाना बनाने के बजाय स्कूलों और शादी-समारोहों पर गिर रहे हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के इन हमलों के बाद अब यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि क्या वाकई सुपर पावर अमेरिका के पास ईरान को हराने की ताकत है या फिर यह सिर्फ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मीडिया में दिए गए हवा-हवाई बयानों और सोशल मीडिया पर चलने वाले एआई (AI) वीडियो तक ही सीमित है।

शादी समारोह पर अमेरिकी एयरस्ट्राइक हाल ही में यूएस सेंटकॉम ने ईरान के दक्षिणी इलाकों, खासकर सिरिक आईलैंड पर एयरस्ट्राइक की। अमेरिकी सेना का दावा था कि यह हमला ईरानी नौसेना और आईआरजीसी (IRGC) के ठिकानों पर किया गया था। लेकिन इसके उलट, ईरान ने दावा किया कि अमेरिका ने रिहायशी इलाके में एक ऐसे घर को निशाना बनाया जहां विवाह-समारोह चल रहा था। इस हमले में 4 बेकसूर लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए।

ट्रंप का ‘बाथरुम तक’ वाला मसखरा बयान दिलचस्प बात यह है कि जिस दिन ईरान के एक शादी समारोह में मौत का यह तांडव मचा, उसी दिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मीडिया से बातचीत में एक हैरान करने वाला बयान दिया। ट्रंप ने दावा किया कि “अमेरिकी सेना की पहुंच ईरान के नेताओं के बाथरूम तक है,” यानी उनकी हर हरकत पर अमेरिका की पैनी नजर है। इससे पहले भी ट्रंप सोशल मीडिया पर एआई वीडियो जारी कर ईरान के खर्ग आईलैंड पर हमले की चेतावनी देते नजर आए थे।

मिसाइल भटके या निशाना चूका? विश्लेषकों का मानना है कि यदि अमेरिकी हथियार इतने ही सटीक हैं, तो वे सैन्य ठिकानों के बजाय रिहायशी इलाकों और आयोजनों तक क्यों पहुंच रहे हैं? जानकारी के मुताबिक, जिस खुजेस्ताह शहर में यह हमला हुआ, वहां से कुछ ही दूरी पर ईरानी नौसेना का एक कम्युनिकेशन टॉवर था, जिसे नेस्तनाबूद करने के चक्कर में दूसरा बम पास ही के एक घर पर जा गिरा।

यह पहली बार नहीं है जब अमेरिकी सेना से इस तरह की गंभीर भूल हुई हो। इससे पहले अफगानिस्तान में भी अमेरिकी सेना ने 2002 और 2008 में दो अलग-अलग जगहों पर शादी समारोहों को हवाई हमलों का शिकार बना दिया था, जिसमें दर्जनों निर्दोष नागरिकों की जान चली गई थी। बार-बार हो रही इन गलतियों ने अमेरिकी सैन्य सटीकता और मध्य-पूर्व की उसकी नीतियों पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।