अखिलेश यादव का चौंकाने वाला दांव, रिलायंस और क्रिकेट से जुड़े धनराज नथवानी को सपा ने बनाया उम्मीदवार

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उत्तर प्रदेश में आगामी राज्यसभा चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी (सपा) ने एक चौंकाने वाला फैसला लेते हुए धनराज परिमल नथवानी को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। कॉरपोरेट और खेल जगत में एक बड़ा नाम रखने वाले धनराज नथवानी रिलायंस समूह से जुड़े हैं और गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन (GCA) के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। सपा प्रमुख अखिलेश यादव का यह कदम राजनीतिक गलियारों में भारी चर्चा का विषय बना हुआ है।

4 घंटे की मैराथन बैठक के बाद तय हुआ नाम

सपा सूत्रों के मुताबिक, धनराज नथवानी महाराष्ट्र (MH) नंबर की गाड़ी से सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से मिलने पहुंचे थे। दोनों नेताओं के बीच करीब चार घंटे तक गहन बैठक चली। इस लंबी चर्चा के बाद ही पार्टी नेतृत्व ने उनके नाम पर अंतिम मुहर लगाई। धनराज नथवानी कभी भी समाजवादी पार्टी के सक्रिय राजनीतिक चेहरे नहीं रहे हैं, ऐसे में अखिलेश यादव द्वारा उन पर भरोसा जताए जाने के सियासी मायने निकाले जा रहे हैं।

कौन हैं धनराज नथवानी?

  • कॉरपोरेट व पारिवारिक पृष्ठभूमि: धनराज नथवानी राज्यसभा सांसद और रिलायंस समूह में डायरेक्टर ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स की जिम्मेदारी संभाल रहे परिमल नथवानी के बेटे हैं। परिमल नथवानी जून 2026 में झारखंड से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर राज्यसभा पहुंचे थे, जबकि इससे पहले वे आंध्र प्रदेश से भी राज्यसभा सांसद रह चुके हैं।

  • क्रिकेट प्रशासन में अनुभव: गुजरात में पले-बढ़े धनराज नथवानी की पहचान सिर्फ बिजनेस तक सीमित नहीं है। वे खेल प्रशासन में भी काफी सक्रिय रहे हैं। साल 2022 में उन्हें गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन (GCA) का अध्यक्ष चुना गया था, जबकि इससे पहले वे उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी भी निभा चुके हैं।

16 अक्टूबर को मतदान, तीसरे उम्मीदवार से बढ़ी हलचल

उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए 16 अक्टूबर 2026 को चुनाव होने हैं। मतदान संपन्न होने के बाद उसी दिन शाम 5 बजे तक चुनाव परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे। इस चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी ने 4 पर्चे खरीदे हैं, जबकि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 8 पर्चे लिए हैं।

संख्याबल के लिहाज से समाजवादी पार्टी के पास अपने दो सांसदों को उच्च सदन भेजने के लिए पर्याप्त वोट मौजूद हैं। इसके बावजूद पार्टी द्वारा तीसरे उम्मीदवार के तौर पर धनराज नथवानी को मैदान में उतारने से राज्य की सियासत में हलचल बढ़ गई है। सियासी विश्लेषकों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या चुनाव में क्रॉस-वोटिंग देखने को मिलेगी या विपक्षी खेमा अन्य दलों के विधायकों के समर्थन का गणित साध रहा है।