UP MLC Election: सपा ने दो शिक्षक सीटों पर बदले प्रत्याशी; गोरखपुर-फैजाबाद से BJP के बागी संजयन त्रिपाठी पर लगाया दांव
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में शिक्षक खंड विधान परिषद (MLC) चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) ने बड़ा दांव चला है। पार्टी ने चुनाव से ठीक पहले गोरखपुर-फैजाबाद और आगरा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में अपने पूर्व घोषित प्रत्याशियों को बदल दिया है। सबसे ज्यादा चर्चा गोरखपुर-फैजाबाद सीट की है, जहां सपा ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) से बागी हुए नेता संजयन त्रिपाठी को मैदान में उतारा है।
गोरखपुर-फैजाबाद सीट: टिकट न मिलने पर संजयन ने हटाया था BJP का झंडा
समाजवादी पार्टी ने गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से पहले कमलेश यादव को उम्मीदवार घोषित किया था, लेकिन अब उनकी जगह संजयन त्रिपाठी को टिकट दिया गया है।
संजयन त्रिपाठी इस सीट से बीजेपी के टिकट की दावेदारी कर रहे थे। हालांकि, बीजेपी ने ध्रुव कुमार त्रिपाठी को अपना उम्मीदवार बना दिया। इससे नाराज होकर संजयन ने बागी रुख अपनाते हुए निर्दलीय नामांकन दाखिल कर दिया था। हाल ही में उनका एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था, जिसमें वह अपनी गाड़ी से बीजेपी का झंडा हटाते हुए नजर आ रहे थे।
अखिलेश यादव से मुलाकात और रातों-रात बदला टिकट
संजयन त्रिपाठी को सपा का टिकट मिलने की पटकथा शुक्रवार को लिखी गई। चिल्लूपार के पूर्व विधायक विनय शंकर तिवारी ने संजयन की मुलाकात सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से कराई थी।
इस राजनीतिक मुलाकात के बाद अखिलेश यादव ने शुक्रवार (2 अक्टूबर) रात में ही पूर्व घोषित प्रत्याशी कमलेश यादव को पार्टी दफ्तर बुला लिया। इसके अगले दिन शनिवार को संजयन त्रिपाठी आधिकारिक रूप से समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए, जिसके तुरंत बाद पार्टी ने उन्हें गोरखपुर-फैजाबाद सीट से अपना नया उम्मीदवार घोषित कर दिया। इस बदलाव के बाद इस सीट पर चुनावी मुकाबला काफी दिलचस्प हो गया है।
आगरा शिक्षक सीट: शशांक की जगह पूर्व एमएलसी डॉ. आकाश अग्रवाल पर भरोसा
गोरखपुर के अलावा समाजवादी पार्टी ने आगरा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भी अपने उम्मीदवार में बदलाव किया है। पार्टी ने यहां से पहले शशांक यादव को मैदान में उतारा था। अब उनकी जगह पूर्व एमएलसी डॉ. आकाश अग्रवाल को नया प्रत्याशी घोषित किया गया है।
पार्टी पदाधिकारियों का कहना है कि दोनों ही सीटों पर प्रत्याशियों के नाम में बदलाव पुराने उम्मीदवारों की पूर्ण सहमति के बाद ही किए गए हैं।
