ओवैसी की “बारात” तैयार, लेकिन यूपी में गठबंधन को कोई नहीं डाल रहा “वरमाला”?

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Owaisi Alliance Offer UP 2027: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक दल अपनी रणनीति तैयार करने में जुट गए हैं। बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप के बीच संभावित गठबंधनों पर भी चर्चा होने लगी है। इसी माहौल में एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भाजपा के खिलाफ विपक्षी दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की इच्छा जताई है। हालांकि, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस की ओर से उनकी पेशकश पर अब तक कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

बिहार विधानसभा चुनाव में मिली सफलता के बाद ओवैसी अब उत्तर प्रदेश में अपनी पार्टी का जनाधार बढ़ाना चाहते हैं। इसके लिए उन्होंने प्रमुख विपक्षी दलों के सामने सहयोग का प्रस्ताव रखा है। उनका कहना है कि भाजपा को लगातार तीसरी बार प्रदेश की सत्ता में आने से रोकने के लिए एआईएमआईएम गठबंधन करने को तैयार है।

ओवैसी ने विपक्ष के सामने रखा सहयोग का प्रस्ताव

गुरुवार को अपनी पार्टी का रुख स्पष्ट करते हुए ओवैसी ने कहा कि उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले दूसरे दलों के साथ समझौते की संभावना खुली हुई है। उन्होंने जोर दिया कि भाजपा को रोकने के उद्देश्य से एआईएमआईएम साथ आने को तैयार है और अब आगे का फैसला विपक्षी दलों को करना है।

इस दौरान उन्होंने बिहार के राजनीतिक घटनाक्रम का भी जिक्र किया। ओवैसी के मुताबिक, उनकी पार्टी के चार विधायकों के दूसरे दल में चले जाने के बाद उन्होंने गठबंधन के लिए केवल छह सीटों की मांग की थी।

उन्होंने विपक्ष के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि शिवसेना में टूट को लोकतंत्र की हत्या बताया गया, लेकिन बिहार में एआईएमआईएम के साथ हुए घटनाक्रम पर किसी ने आवाज नहीं उठाई। ओवैसी ने दावा किया कि इसके बावजूद उनकी पार्टी दोबारा चुनाव लड़ी और मतदाताओं के समर्थन से पांच सीटें हासिल कीं।

गठबंधन की बातचीत के साथ चुनावी तैयारी भी जारी

ओवैसी ने स्पष्ट किया कि एआईएमआईएम उत्तर प्रदेश में पूरी ताकत के साथ चुनाव मैदान में उतरेगी। यदि किसी दल के साथ गठबंधन बनता है, तो उसकी जानकारी सार्वजनिक की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी अपना राजनीतिक भविष्य खुद तय करेगी और अपना नेतृत्व विकसित करेगी। इस तरह एआईएमआईएम ने गठबंधन का विकल्प खुला रखा है, लेकिन अपनी चुनावी तैयारी को दूसरे दलों के जवाब तक सीमित नहीं किया है।

सपा-कांग्रेस की ओर से नहीं मिला सकारात्मक संकेत

गठबंधन पर जवाब के लिए ओवैसी ने दो अक्टूबर तक का समय दिया था। इसके बावजूद प्रमुख विपक्षी दलों की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं आई। सपा समेत अन्य विपक्षी दलों में एआईएमआईएम के साथ चुनाव लड़ने को लेकर हिचकिचाहट दिखाई दे रही है। इन दलों की आशंका है कि ओवैसी की पार्टी की मौजूदगी से वोटों का ध्रुवीकरण हो सकता है। विपक्ष के कुछ हलकों में एआईएमआईएम को ‘वोट कटवा’ भी कहा जाता है, हालांकि यह राजनीतिक आरोप है, कोई स्थापित निष्कर्ष नहीं।

अखिलेश ने पहले के गठबंधन को आगे बढ़ाने की बात कही

एआईएमआईएम के साथ संभावित गठबंधन पर सवाल पूछे जाने पर समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि सपा उसी गठबंधन को आगे बढ़ाने का काम करेगी, जिसने भाजपा को हराया था। उनके इस जवाब में ओवैसी की पेशकश पर स्पष्ट सहमति नहीं दिखी। फिलहाल एआईएमआईएम साथ मिलकर चुनाव लड़ने की इच्छा जता रही है।