‘हमारे मुंह में शब्द न डालें…’: चुनाव आयोग के ‘फॉर्म 6’ विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, 27 अक्टूबर को होगी सुनवाई

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सुप्रीम कोर्ट ने 12 अक्टूबर को एक अहम स्पष्टीकरण देते हुए साफ किया कि उसने चुनाव आयोग (ECI) के संशोधित ‘फॉर्म 6’ (Form 6) की वैधता पर कोई फैसला नहीं सुनाया है। भारतीय नागरिक इस फॉर्म का इस्तेमाल वोटर रजिस्ट्रेशन के लिए करते हैं।

सुप्रीम कोर्ट का यह स्पष्टीकरण ECI के उस दावे पर चल रहे विवाद के बीच आया है, जिसमें कहा गया था कि अदालत ने वोटर लिस्ट के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ (SIR) प्रक्रिया के लिए ‘फॉर्म 6’ के साथ जोड़े गए एक ‘एडिशनल डिक्लेरेशन’ (Additional Declaration) को मंजूरी दे दी है।

‘नए फॉर्म 6 पर कोई फैसला नहीं’

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) की अगुवाई वाली बेंच, जिसमें जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना भी शामिल थे, ने उन दावों को सख्ती से खारिज कर दिया कि उनकी पिछली टिप्पणियों का मतलब नए फॉर्म को मंजूरी देना था।

बेंच ने एक वकील को फटकार लगाते हुए कहा, “हमारे मुंह में शब्द न डालें।” कोर्ट ने जोर देकर कहा कि उसने बदले हुए वर्जन को न तो मंजूरी दी थी और न ही खारिज किया था। जस्टिस बागची ने समझाया कि कोर्ट की पिछली टिप्पणियों का मतलब सिर्फ यह था कि जब बिहार SIR पर फैसला सुनाया गया था, तब यह बदला हुआ फॉर्म अस्तित्व में नहीं था।

बेंच ने निर्देश दिया है कि इस मामले को 27 अक्टूबर को SIR प्रक्रिया और ECI के कामकाज को चुनौती देने वाली दूसरी याचिकाओं के साथ लिस्ट किया जाए।

क्या है एडिशनल डिक्लेरेशन का विवाद?

यह पूरा विवाद एक ‘एडिशनल डिक्लेरेशन’ पर केंद्रित है, जिसे ऑनलाइन फॉर्म 6 में जोड़ा गया था।

  • क्या पूछा गया है? इसमें आवेदकों से पूछा जाता है कि क्या उनके नाम, या उनके माता-पिता या दादा-दादी/नाना-नानी के नाम, पहले की SIR प्रक्रिया के दौरान तैयार की गई वोटर लिस्ट में शामिल थे।

  • याचिकाकर्ताओं की आपत्ति: याचिकाकर्ताओं ने इस बात पर सवाल उठाया है कि क्या ECI कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना सिर्फ ऑनलाइन फॉर्म के जरिए ऐसी अनिवार्यता लागू कर सकता है? बता दें कि ‘फॉर्म 6’ को ‘रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्टर्स रूल्स, 1960’ के तहत तय किया गया है, जो केंद्र सरकार और ECI के परामर्श से बनाए गए थे।

चुनाव आयोग (ECI) ने क्या कहा?

चुनाव आयोग का तर्क है कि तय ‘फॉर्म 6’ में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यह एडिशनल डिक्लेरेशन विशेष रूप से केवल SIR अवधि के लिए लाया गया था। ECI ने अदालत को यह भी बताया कि जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, वहां से इस एडिशनल डिक्लेरेशन को वापस ले लिया गया है।

इससे पहले, 5 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने उन रिकॉर्ड्स की मांग की थी जिनसे पता चले कि इन बदलावों को मंजूरी किसने दी और उनका कानूनी आधार क्या था। अब 27 अक्टूबर 2026 की सुनवाई में इस डिक्लेरेशन की कानूनी वैधता और वोटर रजिस्ट्रेशन पर इसके असर की जांच की जाएगी।