सपा ने राज्यसभा में किसी मुस्लिम को क्यों नहीं भेजा? एसटी हसन ने किया अखिलेश यादव का बचाव
उत्तर प्रदेश में आगामी राज्यसभा चुनाव (Rajya Sabha Election) के लिए समाजवादी पार्टी (SP) ने अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। हालांकि, इन उम्मीदवारों में किसी मुस्लिम चेहरे को जगह नहीं मिलने से पार्टी के ‘PDA’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले पर सवाल खड़े होने लगे हैं। इस विवाद के बीच मुरादाबाद से सपा के पूर्व सांसद एसटी हसन (ST Hasan) का एक बड़ा और अहम बयान सामने आया है। उन्होंने पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) का पुरजोर बचाव करते हुए इसे एक सोची-समझी ‘रणनीति’ करार दिया है।
‘अखिलेश कभी मुसलमानों को छोड़ नहीं सकते’
जब एसटी हसन से पूछा गया कि सपा ने किसी मुस्लिम को टिकट न देकर ऐसे उम्मीदवार को टिकट दिया है जिसके पिता NDA के समर्थन से राज्यसभा सांसद हैं, तो PDA का क्या हुआ? इस पर डॉ. एसटी हसन ने बेबाकी से जवाब देते हुए कहा: “किसी मुस्लिम को राज्यसभा न भेजे जाने से हमें कोई तकलीफ नहीं है। यह हमारे नेता अखिलेश यादव की रणनीति का हिस्सा है। वह कभी मुसलमानों का साथ नहीं छोड़ सकते और न ही उन पर कोई रिस्क ले सकते हैं। अखिलेश जी पूर्ण रूप से मुसलमानों के साथ हैं, भले ही वह जुबान से कहें या न कहें, यह बात मैं जानता हूं।”
उन्होंने आगे कहा कि इस सरप्राइज फैसले के पीछे जरूर कोई गहरी बात छिपी है और इससे समाजवादी पार्टी भविष्य में और मजबूत होगी।
CEC ज्ञानेश कुमार और ‘वोट चोरी’ पर साधा निशाना
मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा हो रहे प्रदर्शनों का एसटी हसन ने समर्थन किया। उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा: “इन्होंने एक-एक कमरे में 100-100 वोट बना दिए और 28 लाख मौजूद लोगों के वोट काट दिए। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला अजीब है कि ‘इस बार वोट नहीं डाल सके तो अगली बार डाल लेना।’ जिस तरह से वोट चुराए जा रहे हैं, हम लोकतंत्र से दूर होकर हिटलरशाही के युग में आ गए हैं।”
इमरान मसूद और यूपी कांग्रेस पर किया तंज
कांग्रेस द्वारा इमरान मसूद को यूपी कांग्रेस का कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने पर एसटी हसन ने तंज कसा। उन्होंने इसे गठबंधन (India Alliance) में सपा पर दबाव बनाने की रणनीति बताया: “इमरान मसूद लगातार ऐसे बयान दे रहे हैं जिससे गठबंधन में दरार आ जाए। यह केवल ज्यादा से ज्यादा सीटें लेने की ‘प्रेशर टैक्टिस’ है। मेरा मानना है कि कांग्रेस को वही सीटें लेनी चाहिए जहां वह जीतने की स्थिति में हो, हारने के लिए ज्यादा सीटें न लें। वैसे भी, इसमें
