October 4, 2026

पोस्टर से गरमाई रामपुर की सियासत, सपा ने पुलिस पर उठाए सवाल

akhilesh-yadav

उत्तर प्रदेश के रामपुर में समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और पार्टी के कद्दावर नेता मोहम्मद आजम खां को लेकर लगाए गए विवादित पोस्टरों का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। सपा नेताओं ने आरोप लगाया है कि शिकायत और पोस्टर लगाने वाली गाड़ी का नंबर देने के बावजूद पुलिस और प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

सपा नगर अध्यक्ष का प्रशासन पर गंभीर आरोप

गुरुवार को समाजवादी पार्टी के नगर अध्यक्ष आसिम राजा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जिला प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले रामपुर के सिविल लाइंस थाना क्षेत्र और उसके आसपास रात के अंधेरे में ऐसे विवादित पोस्टर लगाए गए थे, जिनमें अखिलेश यादव और मोहम्मद आजम खां की तस्वीरों के साथ बेहद आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया था।

आसिम राजा ने कहा कि राजनीतिक विरोध लोकतंत्र का हिस्सा जरूर है, लेकिन विरोध की भी एक सीमा होती है। इस तरह की भाषा से शहर का सौहार्दपूर्ण माहौल खराब हो सकता है।

‘वाहन का नंबर दिया, फिर भी जांच नहीं’

सपा नगर अध्यक्ष ने बताया कि मामले को लेकर जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को एक लिखित शिकायत पत्र सौंपा गया था। शिकायत में उन लोगों की गाड़ी का नंबर भी दर्ज कराया गया था, जो पोस्टर लगाने के लिए मौके पर आए थे।

आसिम राजा ने आरोप लगाया कि प्रशासन राजनीतिक दबाव में काम कर रहा है। उन्होंने कहा, “जब किसी व्यक्ति के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्टर लगाए जाते हैं और शिकायतकर्ता वाहन का नंबर तक पुलिस को उपलब्ध कराता है, तो कम से कम प्रारंभिक जांच कर यह पता लगाया जाना चाहिए कि पोस्टर लगाने वाले लोग कौन थे।”

‘सत्ता पक्ष के लिए अलग और विपक्ष के लिए अलग नियम क्यों?’

सपा नेता ने प्रशासन के रवैये पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि जब सत्ता पक्ष से जुड़े लोगों के खिलाफ सोशल मीडिया पर कोई टिप्पणी होती है, तो तुरंत कार्रवाई की जाती है। लेकिन जब विपक्षी नेताओं के खिलाफ विवादित पोस्टर लगते हैं, जिनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी वायरल होती हैं, तब प्रशासन स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेकर कोई कार्रवाई क्यों नहीं करता?

निष्पक्ष जांच और FIR की मांग

सपा ने मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर पोस्टर लगाने वालों की तुरंत पहचान की जाए और आरोप सही पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।

आसिम राजा ने कहा कि मुरादाबाद और रामपुर को जानबूझकर राजनीतिक रूप से निशाना बनाया जा रहा है। राजनीतिक विरोध मुद्दों और नीतियों पर होना चाहिए, न कि व्यक्तिगत और आपत्तिजनक भाषा के जरिए। उन्होंने चेतावनी दी कि चुनावी माहौल के बीच ऐसी घटनाएं शहर के अमन-चैन को बिगाड़ सकती हैं। फिलहाल, इस पूरे विवाद पर पुलिस या प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।