‘ब्रह्मा-विष्णु-महेश’ की पूजा न करने की शपथ पर घिरे राजकुमार भाटी, अब बोले- हिंदू था, हूं और रहूंगा

सपा नेता राजकुमार भाटी हिंदू धर्म और वायरल शपथ वाले वीडियो पर बयान देते हुए

राजकुमार भाटी ने हिंदू धर्म छोड़ने की खबरों को खारिज करते हुए कहा कि वह हिंदू थे, हैं और रहेंगे।

समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता राजकुमार भाटी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसमें वह मंच पर कुछ लोगों के साथ ब्रह्मा, विष्णु और महेश की पूजा न करने की शपथ दोहराते नजर आ रहे हैं। इस वीडियो के साथ यह दावा किया गया कि भाटी ने हिंदू धर्म छोड़कर बौद्ध धर्म अपना लिया है। रिपोर्ट के अनुसार भाटी ने बाद में एक वीडियो जारी कर कहा कि उन्होंने धर्म नहीं बदला है और ऐसा कोई इरादा भी नहीं है, साथ ही उन्होंने भाजपा पर उन्हें बदनाम करने के लिए सोशल मीडिया पर अभियान चलाने का आरोप लगाया।

भाटी ने हिंदू धर्म को लेकर क्या कहा?

एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में भाटी ने कहा कि वह हिंदू धर्म का बहुत सम्मान करते हैं, क्योंकि यह उन्हें बोलने की आजादी देता है। पर मुट्ठी भर लोग इसे अपनी लाठी से हांकना चाहते हैं और बोलने की आजादी पर पाबंदी लगाना चाहते हैं।

क्या भाटी ने हिंदू धर्म छोड़ने की बात से इनकार किया?

भाटी ने साफ कहा कि वह हिंदू थे, हिंदू हैं और हिंदू ही रहेंगे। उनका कहना है कि उन्हें न तो धर्म छोड़ने की कोई जरूरत महसूस हो रही है।

भाटी किन-किन धार्मिक कार्यक्रमों में जाने की बात कहते हैं?

भाटी ने खुद को सभी धर्मों का सम्मान करने वाला व्यक्ति बताया। उनके अनुसार वह गुरुद्वारे के कार्यक्रमों में जाकर पूरी श्रद्धा से मत्था टेकते हैं, मुसलमानों की मजलिसों में जाते हैं, और हाल ही में नवरात्र में कई जगह पूजा-पाठ में शामिल हुए। उन्होंने यह भी कहा कि वह यज्ञ-हवन करते हैं और रामलीला कमेटी के सदस्य हैं। उनका कहना है कि एक राजनीतिक व्यक्ति को हर जाति और हर धर्म का सम्मान करना चाहिए और जो प्यार से बुलाए, उसके कार्यक्रम में शामिल होना चाहिए।

देवी-देवताओं की पूजा न करने की शपथ पर भाटी का क्या जवाब है?

इस शपथ से जुड़े सवाल पर भाटी ने कहा कि हिंदू समाज का एक बड़ा तबका आर्य समाज को मानता है, जो राम और कृष्ण को महापुरुष मानता है, भगवान नहीं, और पूछा कि क्या वह तबका हिंदू धर्म से खारिज हो गया या उसने धर्म का अपमान किया। उन्होंने कहा कि जो प्रतिज्ञा ली जा रही थी, वह बाबा साहब की 22 प्रतिज्ञाएं हैं, जो काफी प्रसिद्ध हैं और बार-बार दिलाई जाती हैं। भाटी के अनुसार अगर भाजपा को इन पर आपत्ति है तो वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कहलवा दे कि वे बाबा साहब को नहीं मानते। उन्होंने यह भी कहा कि वह सिर्फ वहां मौजूद थे, शपथ पढ़वा नहीं रहे थे, यह उस आयोजन का कार्यक्रम और आयोजकों की मान्यता है, और संविधान हर किसी को मानने या न मानने की आजादी देता है।