इमरान की रिहाई के लिए इस्लामाबाद कूच: रास्तों पर कंटेनर, शहबाज सरकार कर रही KP में गवर्नर रूल पर विचार

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 पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने लॉन्ग मार्च शुरू कर दिया है। खैबर पख्तूनख्वा (KP) के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी की अगुवाई में हजारों पीटीआई समर्थक इस्लामाबाद की तरफ बढ़ रहे हैं। इस कूच ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार की चिंताएं बढ़ा दी हैं। राजधानी की तरफ बढ़ते हुजूम को रोकने के लिए प्रशासन ने रास्तों पर कंटेनर लगाकर भारी घेराबंदी की है। इसी बीच, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हालात से निपटने के लिए सोमवार को एक हाईलेवल बैठक बुलाई है।

शहबाज की बैठक: गवर्नर रूल और इमरजेंसी पर मंथन

प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अध्यक्षता में होने वाली इस अहम बैठक में पीटीआई के लॉन्ग मार्च से पैदा हुए तनाव पर चर्चा की जाएगी। सूत्रों के मुताबिक, बैठक में खैबर पख्तूनख्वा के सुरक्षा हालात का जायजा लिया जाएगा। इसके साथ ही केंद्र सरकार के सामने उपलब्ध संवैधानिक और कानूनी विकल्पों पर विचार किया जाएगा। बताया जा रहा है कि सरकार खैबर पख्तूनख्वा में गवर्नर रूल (राज्यपाल शासन) लगाने या देश में इमरजेंसी लागू करने जैसे सख्त कदम उठाने पर भी विचार कर सकती है।

5 हजार से ज्यादा समर्थकों के साथ इस्लामाबाद की तरफ मार्च

स्काई न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, रविवार को मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी के नेतृत्व में खैबर पख्तूनख्वा से 5 हजार से ज्यादा पीटीआई समर्थक इस्लामाबाद का रुख कर चुके हैं। भीड़ को राजधानी में प्रवेश करने से रोकने के लिए पुलिस और सुरक्षा बलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है और प्रमुख रास्तों को पूरी तरह ब्लॉक कर दिया गया है।

‘सैन्य ऑपरेशन या ड्रोन अटैक बर्दाश्त नहीं करेंगे’

रविवार को गांदी चौक पर अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी ने शहबाज सरकार को चेतावनी दी। अफरीदी ने कहा कि पीटीआई अपनी बात रखने के लिए किसी हथियार का इस्तेमाल नहीं कर रही है, बल्कि जनता की आवाज के दम पर शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ रही है।

उन्होंने केंद्र सरकार को चेताते हुए कहा कि खैबर पख्तूनख्वा में किसी भी तरह के मिलिट्री ऑपरेशन या ड्रोन हमले को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। क्षेत्र की कानून-व्यवस्था का जिक्र करते हुए अफरीदी ने दावा किया कि खैबर में पिछले 22 साल से आतंकवाद पनप रहा है और केवल इमरान खान की सरकार के कार्यकाल में ही यहां अमन कायम हुआ था।