जानिए अगर Flydubai का कंट्रोल वापस ना मिलता तो नेतन्याहू के आदेश पर सब हो जाता राख
फ्लाईदुबई (Flydubai) की एक फ्लाइट में को-पायलट के हमले और विमान के हाईजैक होने के खौफनाक घटनाक्रम ने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया है। अपनी जान पर खेलकर 180 लोगों (174 यात्री और 6 क्रू मेंबर) की जिंदगी बचाने वाले कैप्टन स्मित मच्छार ने इस रोंगटे खड़े कर देने वाले ऑपरेशन की आपबीती सुनाई है।
शनिवार को कैप्टन मच्छार ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बातचीत की। इस बातचीत में उन्होंने कॉकपिट के अंदर हुए संघर्ष और को-पायलट द्वारा कुल्हाड़ी से किए गए जानलेवा हमले का सिलसिलेवार ब्योरा दिया।
कुल्हाड़ी से हमला और कॉकपिट का खौफनाक मंजर
कैप्टन मच्छार ने नेतन्याहू को बताया कि को-पायलट ने उन पर कुल्हाड़ी से हमला कर बुरी तरह घायल कर दिया था। लहूलुहान हालत में उन्हें एहसास हुआ कि विमान तेजी से नीचे की तरफ जा रहा है। उन्होंने पहली कोशिश में कॉकपिट का दरवाजा खोल लिया था, लेकिन को-पायलट ने उसे दोबारा बंद कर दिया।
हमले के बाद मच्छार कॉकपिट के फर्श पर ही गिरे रह गए। उस खौफनाक वक्त में उन्हें सिर्फ विमान के नीचे गिरने की तेज आवाज और यात्रियों की चीख-पुकार सुनाई दे रही थी।
‘मुझमें बस एक आखिरी लड़ाई लड़ने की हिम्मत बची थी’
खून से लथपथ कैप्टन मच्छार ने कॉकपिट के फर्श से घिसटते हुए दरवाजे तक पहुंचने का संघर्ष किया। अपनी उस आखिरी कोशिश को याद करते हुए उन्होंने कहा, “मुझमें बस एक आखिरी लड़ाई लड़ने की हिम्मत बची थी। चाहे इसे निजी वजह कहें या लोगों के लिए किया गया काम, लेकिन मैंने सोचा कि अगर ऐसा नहीं किया, तो मैं मर जाऊंगा।”
कैप्टन ने पूरी ताकत लगाकर दोबारा कॉकपिट के दरवाजे का हैंडल घुमाया और उसे खोलने में कामयाब रहे। उन्होंने बताया कि बाहर यात्री मदद के लिए पूरी तरह तैयार थे, जिसके बाद उन्होंने विमान का कंट्रोल वापस अपने हाथ में ले लिया।
नेतन्याहू ने की तारीफ, बताया ‘पूरी दुनिया का हीरो’
इस घटनाक्रम को सुनने के बाद इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कैप्टन मच्छार की बहादुरी की जमकर सराहना की। नेतन्याहू ने कहा कि वह कैप्टन की हिम्मत और इतने मुश्किल व जानलेवा हालात में भी शांत रहकर सही फैसला लेने की काबिलियत देखकर हैरान हैं। इजरायली पीएम ने स्मित मच्छार को पूरी दुनिया का हीरो करार दिया।
कंट्रोल नहीं मिलता, तो इजरायली सेना मार गिराती विमान
इस पूरी घटना की गंभीरता इजरायल के सख्त हवाई सुरक्षा नियमों से जुड़ी है। इजरायल में यह नियम है कि अगर कोई हाईजैक हुआ विमान चेतावनियों के बावजूद उसके एयर स्पेस (हवाई क्षेत्र) में उड़ता रहता है, तो उस पर सख्त सैन्य एक्शन लिया जाता है।
इस मामले में भी अगर कैप्टन स्मित समय रहते विमान का कंट्रोल अपने हाथों में वापस नहीं लेते, तो इजरायली सेना तोपों या मिसाइलों का इस्तेमाल कर प्लेन को मार गिराती। ऐसी स्थिति में विमान में सवार सभी 174 यात्रियों और 6 क्रू मेंबर्स की जान चली जाती।
