प्रदर्शन कवर करने वाले पत्रकारों के लिए PCI की नई गाइडलाइन, इन 6 नियमों का करना होगा पालन
भारतीय प्रेस परिषद (Press Council of India – PCI) ने विरोध-प्रदर्शन और आंदोलनों को कवर करने वाले पत्रकारों के लिए एक नई और विस्तृत गाइडलाइन जारी की है। यह गाइडलाइन 14 अक्टूबर 2026 को हुई एक अहम बैठक में अपनाई गई थी, जिसके बाद 15 अक्टूबर 2026 को आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति (PR/8/26-27-PCI) के जरिए इसे सार्वजनिक किया गया।
PCI का स्पष्ट कहना है कि मौजूदा हालात और बढ़ते तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए व्यवस्थित कवरेज, पत्रकारों की सुरक्षा, जिम्मेदार रिपोर्टिंग और पुलिस-मीडिया के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना बेहद जरूरी हो गया है। नई गाइडलाइन के तहत पत्रकारों को मुख्य रूप से 6 नियमों का पालन करने का निर्देश दिया गया है।
1. पहचान और पेशेवर आचरण
पत्रकारों को निर्देश दिया गया है कि वे हमेशा अपने मीडिया संस्थान का वैध ID कार्ड और PIB/DIP मान्यता कार्ड साथ रखें और इसे इस तरह पहनें कि वह साफ दिखाई दे। हालांकि, भीड़ में लेनयार्ड के उलझने से बचने के लिए सावधानी बरतने की सलाह भी दी गई है। पुलिस द्वारा पूछे जाने पर पत्रकारों को शांति से अपनी पहचान बतानी चाहिए। उन्हें तटस्थ और पेशेवर रहना होगा। किसी भी सूरत में प्रदर्शन में भाग लेना, पक्ष लेना या टकराव को भड़काना वर्जित है। पुलिस के वैध आदेशों का पालन करें और बहस से बचें।
2. पोजिशनिंग और भीड़ में सुरक्षा
टकराव की स्थिति, खासकर जब तनाव बढ़े या पुलिस कार्रवाई की आशंका हो, तो पत्रकारों को एक सुरक्षित दूरी बनाए रखनी चाहिए। गाइडलाइन स्पष्ट करती है कि पुलिस बैरिकेड्स या गाड़ियों पर कैमरा लगाकर रास्ता न रोकें और न ही सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाएं। भीड़ के बीच छोटे कदमों से सावधानीपूर्वक चलें ताकि गिरने या कुचले जाने से बचा जा सके।
3. स्थितिजन्य जागरूकता (Situational Awareness) और बचाव योजना
पत्रकारों को लगातार भीड़ के व्यवहार, आ रहे लोगों, शोर और नए खतरों पर नजर रखनी चाहिए। किसी भी स्थिति में बाहर निकलने का रास्ता (Escape route) दिमाग में तैयार रखें। अगर धुआं या आंसू गैस छोड़ी जाती है, तो दिखने वाले लैंडमार्क के जरिए सुरक्षित रास्ते से बाहर निकलें और भीड़ के बीच गहराई में जाने से बचें।
4. व्यक्तिगत सुरक्षा उपाय और प्राथमिक उपचार
सुरक्षा के लिहाज से पत्रकारों को हमेशा अपने साथ फर्स्ट-एड किट, जरूरी दवाएं, पानी, हाई-प्रोटीन स्नैक्स, टॉर्च, रुमाल/तौलिया और आंखों के बचाव के लिए गॉगल्स (चश्मा) रखने की सलाह दी गई है। खतरे के अनुसार हेलमेट और बॉडी आर्मर पहना जा सकता है, लेकिन इसके भरोसे अनावश्यक जोखिम नहीं लेना चाहिए। आंसू गैस के गोले, फ्लैश-बैंग या स्मोक ग्रेनेड को कभी न छुएं, क्योंकि वे गर्म या फटने वाले हो सकते हैं।
5. समन्वय और संचार
असाइनमेंट के दौरान पत्रकारों को लगातार अपने न्यूजरूम के संपर्क में रहना चाहिए। न्यूजरूम को एक संपर्क व्यक्ति तय करना होगा जो रिपोर्टर की लोकेशन पर नजर रखे। फ्रीलांस पत्रकारों को किसी भरोसेमंद एडिटर को अपनी लोकेशन और वापसी का समय बताकर जाना चाहिए। नियोजित प्रदर्शनों के लिए मीडिया संस्थानों को पुलिस के साथ पहले से प्रोटोकॉल और मीडिया स्टेजिंग एरिया तय कर लेना चाहिए।
6. नैतिक और जिम्मेदार रिपोर्टिंग
PCI ने पत्रकारों से सटीक, वस्तुनिष्ठ और निष्पक्ष रिपोर्टिंग करने की अपील की है। सत्यापित तथ्य और अफवाह में अंतर करना जरूरी है। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बयानों को समान पत्रकारीय जांच की कसौटी पर कसें। सुरक्षा के लिहाज से पुलिस की पोजीशन, रणनीति या भागने के रास्तों को रियल-टाइम में प्रसारित न करें। एक्सक्लूसिव फुटेज या उपकरणों को बचाने के दबाव में अपनी जान जोखिम में न डालें। नाबालिगों, घायलों और संकट में फंसे नागरिकों को फिल्माते समय उनकी निजता का पूरा ध्यान रखें।
