September 15, 2026

न घड़ी बदलेगी, न टाइम जोन! मार्च 2027 से लागू होगा ‘वन नेशन, वन टाइम’

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नई दिल्ली: भारत की डिजिटल और प्रशासनिक व्यवस्था में एक बड़ा ऐतिहासिक और तकनीकी सुधार होने जा रहा है। केंद्र सरकार देश भर की डिजिटल प्रणालियों को एक ही सटीक समय चक्र से जोड़ने के लिए ‘वन नेशन वन टाइम’ पहल को जमीन पर उतारने के लिए पूरी तरह तैयार है। इसके तहत ‘लीगल मेट्रोलॉजी (इंडियन स्टैंडर्ड टाइम) रूल्स, 2026’ को मार्च 2027 से आधिकारिक तौर पर पूरे देश में लागू कर दिया जाएगा। इस नई नीति का मुख्य मकसद देश के अलग-अलग डिजिटल सर्वरों और सरकारी तंत्रों में मौजूद समय के मामूली अंतर (मिलीसेकंड का फर्क) को पूरी तरह खत्म करना है।

आपकी आम जिंदगी और घड़ियों पर क्या पड़ेगा असर?

इस नई पॉलिसी के लागू होने से आम नागरिकों को अपनी कलाई घड़ी, दीवार घड़ी या स्मार्टफोन के समय में कोई बदलाव नहीं करना होगा। भारत का हर नागरिक पहले की तरह ही भारतीय मानक समय (IST) का पालन करेगा। असल बदलाव आपके उपकरणों में नहीं, बल्कि उन डिजिटल प्रणालियों और बैकएंड सर्वर्स में होगा जिनके भरोसे आपकी रोजमर्रा की गतिविधियां संचालित होती हैं।

आज के डिजिटल दौर में समय की मिलीसेकंड सटीकता का बड़ा महत्व है:

  • UPI और बैंकिंग: जब आप रात 11:59 बजे यूपीआई से लेनदेन करते हैं और बैंक के सर्वर व आपके फोन के समय में महज दो सेकंड का अंतर होता है, तो अक्सर ट्रांजैक्शन फेल हो जाता है। नया नियम इस समस्या को खत्म करेगा।

  • शेयर बाजार और रेलवे: शेयर बाजार के कारोबार, रेलवे की तत्काल टिकट बुकिंग और एयरलाइन शेड्यूलिंग में मिलीसेकंड का अंतर भी बड़ी गड़बड़ी पैदा करता है।

नई व्यवस्था के तहत देश का हर कानूनी, वित्तीय, प्रशासनिक और तकनीकी ढांचा सीधे दिल्ली स्थित नेशनल फिजिकल लेबोरेटरी (NPL) की ‘परमाणु घड़ी’ (Atomic Clock) से जुड़ जाएगा।

क्या है भारतीय मानक समय (IST) का गणित?

भारत का आधिकारिक समय इंडियन स्टैंडर्ड टाइम (IST) कहलाता है। देश का समय 82.5 डिग्री पूर्वी देशांतर रेखा के आधार पर तय किया जाता है, जो उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर से होकर गुजरती है। भौगोलिक गणित के अनुसार भारत का मानक समय कोऑर्डिनेटेड यूनिवर्सल टाइम (UTC) और ग्रीनविच मीन टाइम (GMT) से ठीक 5 घंटे 30 मिनट आगे रहता है। यानी जब लंदन में दोपहर के 12 बजते हैं, तब भारत में शाम के 5:30 बजते हैं। भारत और श्रीलंका दोनों ही इसी मानक समय का पालन करते हैं। आधुनिक युग में समय का सटीक निर्धारण सीजियम-133 परमाणु घड़ियों द्वारा किया जाता है, जिनमें लाखों वर्षों में भी एक सेकंड की गड़बड़ी नहीं आती।

भारत में एक ही मानक समय क्यों जरूरी है?

भारत पूर्व से पश्चिम तक लगभग 2,933 किलोमीटर के विशाल दायरे में फैला है। इसका भौगोलिक विस्तार 68 डिग्री से 97 डिग्री पूर्वी देशांतर तक है। इसका मतलब है कि भारत के सबसे पूर्वी राज्य (अरुणाचल प्रदेश) और सबसे पश्चिमी राज्य (गुजरात) के बीच लगभग 30 देशांतर रेखाओं का फासला है। गणित के हिसाब से यह अंतर पूरे 2 घंटे का होता है।

यदि भारत में एक ही मानक समय न होता, तो गुजरात और अरुणाचल प्रदेश की घड़ियों में दो घंटे का फर्क होता। इससे ट्रेनों का परिचालन, उड़ानों का समय और बैंक का कामकाज चलाना लगभग असंभव हो जाता। इसी भारी भ्रम से बचने के लिए 1 सितंबर 1947 को आधिकारिक रूप से IST को पूरे देश के लिए लागू किया गया था।

पूर्वोत्तर से उठती रही है दो टाइम जोन की मांग

भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में सूरज जल्दी निकलता और ढलता है। गर्मियों में वहां सुबह 4 बजे ही धूप निकल आती है, जबकि शाम 4:30 बजे अंधेरा छा जाता है। इससे दफ्तर के कई कीमती घंटे बर्बाद होते हैं और बिजली की खपत बढ़ती है। इसी वजह से असम के चाय बागानों में आज भी अनौपचारिक रूप से ‘चाय बागान टाइम’ चलता है। हालांकि, केंद्र सरकार ने प्रशासनिक तालमेल और रेल तंत्र की सुरक्षा को देखते हुए देश में दो टाइम जोन लागू करने के सुझाव को खारिज कर दिया है।