भागवत के बयान पर प्रियांक खरगे का पलटवार, चुनाव आयोग और RSS पर उठाए सवाल
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत द्वारा विजयादशमी के मौके पर ‘रेजीम चेंज’ (सत्ता परिवर्तन) को लेकर दिए गए बयान ने नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है। कर्नाटक के मंत्री और कांग्रेस नेता प्रियांक खरगे ने इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए चुनाव आयोग (EC) की निष्पक्षता और RSS की वास्तविक भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। खरगे ने संघ को चुनौती दी है कि वह खुद को सांस्कृतिक संगठन बताना छोड़कर आधिकारिक तौर पर एक राजनीतिक दल के रूप में पंजीकृत कराए।
चुनाव आयोग और निष्पक्ष चुनाव पर उठाए सवाल
प्रियांक खरगे ने आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त और मतदाता सूची से जुड़ी व्यवस्थाओं पर वर्तमान सत्तारूढ़ पक्ष का गहरा प्रभाव है। उन्होंने दावा किया कि जब फॉर्म 6 और फॉर्म 7 जैसी चुनावी प्रक्रियाओं पर कथित तौर पर कब्जा कर लिया गया है, तो ऐसे में देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की उम्मीद कैसे की जा सकती है। इसके साथ ही, उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) को मिली कानूनी सुरक्षा पर भी सवाल उठाते हुए पूछा कि आखिर उन्हें न्यायिक संरक्षण की आवश्यकता क्यों पड़ रही है।
‘राजनीति पर राय देनी है तो पार्टी बनाएं’
कांग्रेस नेता ने संघ की कार्यप्रणाली पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि RSS के नेता लगातार राजनीति, अर्थव्यवस्था, रक्षा और विदेश नीति जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय विषयों पर अपनी राय रखते हैं। खरगे ने सवाल किया कि यदि संघ राष्ट्रीय नीतियों में इतनी गहरी दखलअंदाजी करता है, तो उसे केवल एक ‘सांस्कृतिक संगठन’ के रूप में क्यों पेश किया जाता है? उन्होंने कहा कि संघ को अपनी यह आड़ छोड़कर सीधे राजनीतिक मैदान में आना चाहिए।
RSS के मार्च पास्ट पर भी स्पष्ट किया रुख
कर्नाटक में RSS के मार्च पास्ट को लेकर चल रहे प्रशासनिक विवाद पर भी खरगे ने अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार केवल यह सुनिश्चित करना चाहती है कि आयोजन से पहले आवश्यक अनुमति ली जाए। उनके मुताबिक, संघ पर भी वही नियम लागू होते हैं जो राज्य के अन्य संगठनों पर होते हैं और स्थानीय अधिकारियों को कानून व्यवस्था के अनुसार काम करने के निर्देश दिए गए हैं।
भागवत ने दशहरे पर क्या कहा था?
गौरतलब है कि 20 अक्टूबर 2026 को नागपुर में विजयादशमी समारोह को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने फ्रांस, अल्बानिया, बांग्लादेश और नेपाल में हुए राजनीतिक घटनाक्रमों का हवाला दिया था। उन्होंने कहा था कि भारत में भी ‘रिजीम चेंज’ की कोशिशें हो रही हैं, लेकिन बाहरी ताकतों के ऐसे प्रयास यहां सफल नहीं होंगे। भागवत ने दावा किया था कि कुछ महत्वाकांक्षी नेता अपने राजनीतिक हितों के लिए ऐसे प्रयासों का हिस्सा बनते हैं, जो समाज में केवल विभाजन पैदा करते हैं।
