सरकार बदलना नहीं, पूरी व्यवस्था बदलना है रिजीम चेंज, जानिए दुनिया में अभीतक कहाँ हुआ
“रिजीम चेंज” सिर्फ सत्ता के हस्तांतरण या चुनाव में सरकार बदलने का नाम नहीं है। यह किसी देश की राजनीतिक व्यवस्था, सत्ता की मूल संरचना, नेतृत्व प्रणाली और शासन के नियमों में मौलिक बदलाव को कहते हैं। इसमें अक्सर बल, क्रांति, तख्तापलट, विदेशी हस्तक्षेप या जबरदस्ती शामिल होती है।
मतलब क्या है?
राजनीतिक विज्ञान और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में “रिजीम” का मतलब सिर्फ मौजूदा सरकार नहीं, बल्कि सत्ता की पूरी वास्तुकला है—संविधान, सत्ता में आने के नियम, संस्थानों की प्रकृति और वैचारिक आधार। जब यह पूरी संरचना बदल दी जाए (नेतृत्व, प्रशासन तंत्र और वैधता के स्रोत सहित), तो उसे रिजीम चेंज कहा जाता है।
यह घरेलू भी हो सकता है (क्रांति, सैन्य तख्तापलट) और विदेशी दबाव या आक्रमण से भी थोपा जा सकता है। सामान्य चुनाव या लोकतांत्रिक सत्ता परिवर्तन को आमतौर पर रिजीम चेंज नहीं माना जाता।
सबसे पहले यह शब्द कहाँ इस्तेमाल हुआ?
ऑक्सफर्ड इंग्लिश डिक्शनरी (OED) के अनुसार, “regime change” का सबसे पुराना ज्ञात प्रयोग 1925 में लॉस एंजिल्स टाइम्स अखबार में हुआ था।
शुरुआत में यह सामान्य अर्थ में इस्तेमाल होता था। बाद में, खासकर 1980 के दशक से, यह अमेरिकी विदेश नीति की भाषा का हिस्सा बन गया।
- रोनाल्ड रीगन के समय लीबिया में मुअम्मर गद्दाफी के खिलाफ “regime change” की बात की गई थी (1986 के आसपास)।
- बिल क्लिंटन और जॉर्ज डब्ल्यू. बुश ने इराक में सद्दाम हुसैन के खिलाफ इसे बार-बार इस्तेमाल किया। 1998 का इराक लिबरेशन एक्ट इसी दिशा में था।
इस शब्द को अक्सर विदेशी हस्तक्षेप को नरम भाषा में पेश करने के लिए “यूफेमिज्म” (शिष्ट भाषा) के रूप में देखा जाता है।
हाल के दस वर्षों (लगभग 2016-2026) में प्रमुख उदाहरण
पिछले एक दशक में कई जगहों पर रिजीम चेंज हुआ या प्रयास हुए। कुछ प्रमुख मामले:
- सूडान (2019): लंबे समय तक सत्ता में रहे उमर अल-बशीर को जन आंदोलन और सेना के दबाव से हटाया गया।
- अफगानिस्तान (2021): अमेरिकी सेना की वापसी के बाद तालिबान ने सत्ता वापस हासिल की। यह एक तरह का रिजीम चेंज था, जिसमें पहले स्थापित व्यवस्था ध्वस्त हो गई।
- श्रीलंका (2022): आर्थिक संकट और जन आंदोलन (अरागलय) के कारण राष्ट्रपति गोतबाया राजपक्षे देश छोड़कर भाग गए।
- बांग्लादेश (2024): छात्र-आंदोलन के दबाव में शेख हसीना की सरकार गिर गई और उन्होंने देश छोड़ दिया।
- सीरिया (दिसंबर 2024): बशर अल-असद की लंबे समय की हुकूमत समाप्त हुई। विद्रोही बलों (खासकर हयात तहरीर अल-शाम) के आक्रमण के बाद असद मास्को भाग गए।
- मेडागास्कर (2025): राष्ट्रपति आंद्री राजोएलिना को सेना और विरोध के दबाव में हटाया गया।
- वेनेजुएला (जनवरी 2026): अमेरिकी सैन्य अभियान के दौरान निकोलस मदुरो को पकड़ लिया गया।
इनके अलावा अफ्रीका के कई देशों (माली, बुर्किना फासो, नाइजर आदि) में सैन्य तख्तापलट हुए, जिन्हें भी रिजीम चेंज की श्रेणी में रखा जाता है। नेपाल और कुछ अन्य जगहों पर भी जन आंदोलनों ने सत्ता परिवर्तन को मजबूर किया।
रिजीम चेंज शब्द आजकल अंतरराष्ट्रीय राजनीति में काफी चर्चा में रहता है। यह कभी लोकतंत्र लाने का दावा बनकर आता है, तो कभी शक्ति प्रदर्शन या रणनीतिक हितों का साधन। इतिहास बताता है कि बाहरी हस्तक्षेप से थोपे गए बदलाव अक्सर अस्थिरता, गृहयुद्ध और लंबे संकट को जन्म देते हैं। घरेलू जन-आंदोलन से हुए बदलावों के नतीजे भी अलग-अलग रहे हैं।
यह शब्द सिर्फ राजनीतिक घटना का वर्णन नहीं करता, बल्कि सत्ता, वैधता और अंतरराष्ट्रीय शक्ति संतुलन की गहरी बहस खोलता है।
