डेटा प्राइवेसी मामले में मेटा को बड़ा झटका, अमेरिकी अदालत ने ठोका 2.36 लाख करोड़ रुपये का ऐतिहासिक जुर्माना

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सोशल मीडिया दिग्गज कंपनी मेटा (फेसबुक, इंस्टाग्राम, वॉट्सएप) को अमेरिका में डेटा प्राइवेसी मामले में बड़ा कानूनी झटका लगा है। न्यू मैक्सिको की एक अदालत ने चर्चित कैम्ब्रिज एनालिटिका (Cambridge Analytica) डेटा लीक स्कैंडल में मेटा पर 25 अरब डॉलर (करीब 2.36 लाख करोड़ रुपये) का भारी-भरकम जुर्माना लगाया है। इसे अमेरिकी इतिहास में किसी भी कंपनी के खिलाफ राज्य-स्तर पर सुनाया गया अब तक का सबसे बड़ा फैसला माना जा रहा है।

8.7 करोड़ यूजर्स का डेटा हुआ था चोरी

यह पूरा विवाद कैम्ब्रिज एनालिटिका स्कैंडल से जुड़ा है। इस मामले में आरोप था कि एक ब्रिटिश फर्म ने थर्ड-पार्टी ऐप के जरिए लगभग 8.7 करोड़ फेसबुक यूजर्स का निजी डेटा उनकी सहमति के बिना चुरा लिया था। बाद में इस डेटा का इस्तेमाल राजनीतिक विज्ञापनों और यूजर्स की प्रोफाइलिंग के लिए किया गया। कोर्ट और जूरी ने अपनी जांच में पाया कि मेटा ने अपने यूजर्स को उनके प्राइवेट डेटा की सुरक्षा और उसके इस्तेमाल के मुद्दे पर पूरी तरह गुमराह किया।

219 अरब डॉलर तक पहुंच सकती थी जुर्माने की राशि

सितंबर 2026 में कंपनी ने अदालत के सामने अपना पक्ष रखा था, जिसे न्यू मैक्सिको के उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत भ्रामक पाया गया। अदालत के अनुसार, मेटा और उसके नेतृत्व द्वारा दिए गए 29 बयानों में से 26 मिसलीडिंग थे। इन बयानों के कारण राज्य के उपभोक्ता संरक्षण कानून का 4.3 करोड़ से अधिक बार उल्लंघन हुआ। नियम के मुताबिक, हर उल्लंघन पर 5,000 डॉलर तक का जुर्माना लगाया जा सकता था, जिससे कुल राशि 219 अरब डॉलर तक पहुंच सकती थी। जज फ्रांसिस मैथ्यू ने इस राशि को घटाकर 25 अरब डॉलर कर दिया। इस जुर्माने की रकम का इस्तेमाल राज्य की शिक्षा (Education) व्यवस्था पर किया जाएगा।

फैसले के खिलाफ उच्च अदालत में अपील करेगी मेटा

इस फैसले पर मेटा ने कड़ी आपत्ति जताई है। कंपनी के मुख्य कानूनी अधिकारी सीजे महोनी ने स्पष्ट किया है कि मेटा इस फैसले के खिलाफ उच्च अदालत में अपील दायर करेगी। कंपनी का तर्क है कि अदालत द्वारा लगाया गया यह जुर्माना और आरोप दोनों ही पूरी तरह अनुचित और बेतुके हैं।