सूखे पर CM फडणवीस की अहम बैठक से दोनों डिप्टी सीएम नदारद; क्या महायुति के अंदर तालमेल की कमी है? उठे सवाल
महाराष्ट्र में इस समय भीषण सूखे की स्थिति बनी हुई है। राज्य सरकार किसानों और आम लोगों को राहत पहुंचाने के लिए कदम उठा रही है। लेकिन इस गंभीर संकट के बीच सत्ताधारी महायुति (Mahayuti) गठबंधन के भीतर समन्वय (Coordination) को लेकर एक नया राजनीतिक सवाल खड़ा हो गया है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (CM Devendra Fadnavis) की अध्यक्षता में उनके आधिकारिक आवास ‘वर्षा’ पर सूखा राहत कार्यों की समीक्षा के लिए एक अहम बैठक हुई। हालांकि, इस महत्वपूर्ण बैठक में दोनों उपमुख्यमंत्रियों—एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) और सुनेत्रा पवार (Sunetra Pawar)—को कथित तौर पर आमंत्रित नहीं किया गया, जिससे राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।
चूक या समन्वय की कमी? उठ रहे सवाल
मुख्यमंत्री की मौजूदगी में हुई इस बैठक में मुख्य रूप से सूखे से निपटने के उपायों और किसानों को दी जाने वाली राहत पर चर्चा हुई। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब राज्य इतने बड़े संकट से जूझ रहा है, तो राहत कार्यों की इस बड़ी समीक्षा बैठक से दोनों उपमुख्यमंत्रियों को क्यों दूर रखा गया?
राजनीतिक हलकों में यह बहस छिड़ गई है कि क्या यह महज मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के स्तर पर हुई कोई चूक है, या फिर महायुति गठबंधन के शीर्ष नेताओं के बीच तालमेल में कोई परेशानी चल रही है।
दोनों डिप्टी सीएम भी सूखे पर रहे हैं सक्रिय
समीक्षा बैठक में दोनों उपमुख्यमंत्रियों की गैरमौजूदगी इसलिए भी ध्यान खींच रही है क्योंकि दोनों ही नेता सूखे के मुद्दे पर पहले से सक्रिय रहे हैं:
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एकनाथ शिंदे: उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने हाल ही में नई दिल्ली जाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। इस बैठक में उन्होंने प्रमुखता से महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त इलाकों का मुद्दा उठाया था और प्रभावित क्षेत्रों के लिए जल्द से जल्द राहत कार्य तेज करने की मांग की थी।
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सुनेत्रा पवार: दूसरी उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार भी सूखे के हालात पर नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने हाल ही में कृषि मंत्री दत्ता भरणे के साथ प्रभावित इलाकों की स्थिति का जायजा लिया था और अधिकारियों को तुरंत ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए थे।
आगे क्या? स्पष्टीकरण का इंतजार
महाराष्ट्र में सूखे जैसी प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए सत्ताधारी गठबंधन और प्रशासन के बीच मजबूत तालमेल होना बेहद जरूरी है। ऐसे अहम समय में दोनों उपमुख्यमंत्रियों को समीक्षा बैठक से बाहर रखे जाने की खबरों ने विपक्ष को भी निशाना साधने का मौका दे दिया है।
हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केवल एक बैठक के घटनाक्रम के आधार पर गठबंधन में विश्वास या तालमेल की कमी का सीधा निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या मुख्यमंत्री कार्यालय या महायुति के अन्य शीर्ष नेताओं की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण आता है या नहीं।
