September 15, 2026

मद्रास हाईकोर्ट की अजीबोगरीब टिप्पणी: तलाक के मामले में पत्नी की कर दी वोडाफोन के ‘पग’ कुत्ते से तुलना

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मद्रास हाईकोर्ट की एक हालिया टिप्पणी इन दिनों कानूनी गलियारों से लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बनी हुई है। हालांकि मामला मूल रूप से एक तलाक की याचिका से जुड़ा था, लेकिन अदालत द्वारा दिए गए एक अनोखे उदाहरण ने सबका ध्यान खींच लिया है। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पत्नी की तुलना वोडाफोन के पुराने और चर्चित विज्ञापन में दिखने वाले ‘पग’ (Pug) कुत्ते से कर दी, जिसके बाद से इस पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

क्या था पूरा मामला? यह पूरा मामला तमिलनाडु के शिवगंगा जिले की एक फैमिली कोर्ट से जुड़ा है, जहां एक दंपत्ति की शादी सितंबर 1992 में हुई थी और उनके चार बच्चे हैं। नौकरी के सिलसिले में पति शिवगंगा से मुंबई चला गया था, लेकिन पत्नी उसके साथ नहीं गई और दोनों लंबे समय से अलग-अलग रह रहे थे।

जब यह मामला हाईकोर्ट पहुंचा, तब तक दोनों के बीच की दूरी करीब 16 साल की हो चुकी थी और पति की उम्र 67 वर्ष हो गई थी। पति ने पत्नी पर अवैध संबंध का आरोप लगाते हुए तलाक की अर्जी दी थी, जिसे ट्रायल कोर्ट ने खारिज कर दिया था। निचली अदालत का तर्क था कि पति ने खुद पत्नी को अपने साथ नहीं रखा, इसलिए वह अपनी गलती का फायदा उठाकर तलाक नहीं मांग सकता।

हाईकोर्ट ने क्यों स्वीकार किया तलाक का फैसला? जस्टिस जी.आर. स्वामीनाथन और जस्टिस एम.डी. सुमति की डिवीजन बेंच ने निचली अदालत के तर्क को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि हर परिस्थिति में पति-पति का एक साथ रहना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं होता। कोर्ट ने इसके लिए सैनिक की नौकरी का उदाहरण दिया—जहां आर्मी बैरक में हर बार परिवार के साथ घर बसाना मुमकिन नहीं होता। इसी तरह यदि पत्नी खुद कामकाजी है, तो उसके अपने करियर और जिम्मेदारियां हो सकती हैं।

इसी संदर्भ में कोर्ट ने वोडाफोन के उस मशहूर विज्ञापन का जिक्र किया, जिसमें पग कुत्ता हर जगह अपने मालिक के पीछे-पीछे चलता नजर आता है। अदालत का मुख्य संदेश यह था कि शादी का यह मतलब कतई नहीं है कि पति या पत्नी अपनी नौकरी, करियर और निजी परिस्थितियों को ताक पर रखकर हर जगह एक-दूसरे के पीछे साये की तरह चलते रहें।

सोशल मीडिया और वकीलों की आपत्ति अदालत के कानूनी फैसले से ज्यादा उसकी भाषा और तुलना को लेकर लोगों में नाराजगी है। सोशल मीडिया यूजर्स ने सवाल उठाया कि जब अदालत विवाह में समानता और व्यावहारिकता की बात कर रही थी, तब पत्नी के लिए किसी पालतू जानवर का उदाहरण देने की क्या जरूरत थी। सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता चारु माथुर ने भी इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि एक महिला विवाह में बराबर की भागीदार होती है, न कि किसी की पालतू।