लखनऊ में 80 करोड़ का ओवरब्रिज, अखिलेश-माया से क्या है कनेक्शन?
लखनऊ: वीआईपी इलाके विक्रमादित्य मार्ग पर रेलवे ने एक नए रोड ओवरब्रिज का निर्माण कार्य शुरू कर दिया है। उत्तर रेलवे की रोड सेफ्टी प्रोजेक्ट विंग द्वारा बनाए जा रहे करीब 650 मीटर लंबे और चार लेन वाले इस पुल पर लगभग 80 करोड़ रुपये की लागत आएगी। यह बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट राजनीतिक रूप से इसलिए भी चर्चा का विषय है क्योंकि इस पुल का इतिहास समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती के बीच हुई एक पुरानी सियासी खींचतान से जुड़ा है।
कहां से कहां तक बनेगा नया पुल
रेलवे के अधिकारियों के अनुसार, विक्रमादित्य मार्ग पर बनने वाला यह नया ओवरब्रिज दिलकुशा तिराहे से शुरू होकर विक्रमादित्य मार्ग होते हुए राज्य अतिथि गृह के पास उतरेगा। पुल के निर्माण को अगस्त 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। दिलचस्प बात यह है कि इस ओवरब्रिज का निर्माण ठीक उसी जगह के सामने से हो रहा है, जहां अखिलेश यादव का पुराना सरकारी आवास था, जिसे वे अब खाली कर चुके हैं। करीब डेढ़ दशक पहले बनी यह योजना अब जाकर जमीन पर उतरनी शुरू हुई है।
माल एवेन्यू पुल और 2007 का बसपा सरकार का फैसला
इस नए ओवरब्रिज के निर्माण की पृष्ठभूमि में माल एवेन्यू रेलवे क्रॉसिंग का पुराना विवाद है। दरअसल, माल एवेन्यू रेलवे क्रॉसिंग पर पुल बनाने की मूल योजना मुलायम सिंह यादव सरकार के कार्यकाल (2003 से 2007) के दौरान तैयार की गई थी। लेकिन साल 2007 में जब मायावती मुख्यमंत्री बनीं, तो इस योजना को रद्द कर दिया गया। इसकी मुख्य वजह यह थी कि प्रस्तावित पुल मायावती के माल एवेन्यू स्थित आवास और बसपा कार्यालय के ठीक सामने से गुजर रहा था, जिस पर उन्होंने आपत्ति जताई थी।
यूपीए सरकार में मिली विक्रमादित्य मार्ग पुल को मंजूरी
माल एवेन्यू पुल का प्रोजेक्ट रद्द होने के बाद, विकल्प के तौर पर वर्ष 2011 में केंद्र की यूपीए सरकार के दौरान रेल बजट में एक नई योजना को मंजूरी दी गई। यह योजना रेलवे क्रॉसिंग संख्या 213 पर विक्रमादित्य मार्ग से दिलकुशा तक ओवरब्रिज बनाने की थी। शुरुआती दौर में करीब 14.64 करोड़ रुपये की लागत वाली इस योजना के लिए 10 लाख रुपये की टोकन मनी जारी की गई। इसके बाद 2012-13 के रेल बजट में भी 1.37 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया। हालांकि, कई सालों तक रेलवे बजट में टोकन मनी देता रहा, लेकिन निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका।
अखिलेश सरकार में फिर शुरू हुआ माल एवेन्यू पुल का काम
साल 2012 में सत्ता परिवर्तन हुआ और अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। सत्ता में आते ही उन्होंने मायावती सरकार द्वारा रद्द किए गए माल एवेन्यू पुल के प्रोजेक्ट को दोबारा शुरू करवा दिया। वर्ष 2013 में करीब 44 करोड़ रुपये की लागत से मायावती के आवास और बसपा कार्यालय के सामने से सेना भर्ती मुख्यालय तक ओवरब्रिज का शिलान्यास किया गया।
बसपा सुप्रीमो मायावती ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए इस निर्माण का कड़ा विरोध किया। तमाम विरोधों के बावजूद राज्य सेतु निगम ने अपने हिस्से का करीब 655.94 मीटर पुल तैयार कर दिया। बाद में रेलवे ने भी क्रॉसिंग के ऊपर के हिस्से का काम सेतु निगम को सौंप दिया। 4 नवंबर 2014 को तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस विवादित ओवरब्रिज का लोकार्पण कर दिया था।
अब माल एवेन्यू पुल के लोकार्पण के लगभग दस साल बाद, रेलवे ने विक्रमादित्य मार्ग से दिलकुशा तक प्रस्तावित उसी पुराने ओवरब्रिज प्रोजेक्ट का जमीनी निर्माण अंततः शुरू कर दिया है।
