September 15, 2026

सोनम वांगचुक की केंद्र को खुली चेतावनी: ‘9 सितंबर की बैठक में ठोस नतीजा नहीं निकला, तो लद्दाख में होगा आर-पार का आंदोलन’

sonam wangchuk

लद्दाख के भविष्य और पूर्ण राज्य के दर्जे की मांग को लेकर एक बार फिर बड़े आंदोलन की आहट सुनाई दे रही है। लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और मशहूर जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने केंद्र सरकार को सख्त चेतावनी दी है। उनका कहना है कि अगर 9 सितंबर को नई दिल्ली में गृह मंत्रालय (MHA) के साथ होने वाली सब-कमेटी की बैठक बेनतीजा रहती है या उनकी मुख्य मांगों पर कोई ठोस प्रगति नहीं होती, तो वे बहुत बड़े पैमाने पर अपना आंदोलन दोबारा शुरू करेंगे।

‘सकारात्मक नतीजे का स्वागत, वरना आंदोलन तय’ LAB के चेयरमैन शेरिंग दोरजे लाक्रुक ने स्पष्ट किया है कि लद्दाख के क्षेत्रीय नेता बातचीत का स्वागत करते हैं, लेकिन उनका अगला कदम पूरी तरह से इस बैठक के नतीजों पर निर्भर करेगा। लाक्रुक ने कहा, “अगर बैठक का नतीजा सकारात्मक रहता है और रचनात्मक बातचीत होती है, तो हम उसका स्वागत करेंगे। वरना हम अपने आंदोलन को बहुत जोरदार तरीके से तेज करेंगे।”

इसके साथ ही लाक्रुक ने पिछले साल 24 सितंबर को हुई हिंसा की जांच में देरी और मुकदमों की वापसी में हो रहे भेदभाव पर भी सरकार को घेरा। उनके मुताबिक, 80 में से अब तक सिर्फ 25 मामले ही वापस लिए गए हैं। उन्होंने कहा, “लद्दाख के लोगों की जान इतनी सस्ती नहीं है। हम सभी भारतीय हैं और हमारे साथ समान व्यवहार होना चाहिए।”

फिलहाल टली ‘कारगिल से लेह पदयात्रा’ सोनम वांगचुक ने जानकारी दी कि LAB सितंबर के महीने को पिछले साल मारे गए, घायल हुए और जेल गए लोगों की याद में ‘शहीद माह’ के रूप में मना रहा है। इसी के तहत 10 सितंबर से कारगिल से लेह तक एक बड़ी पदयात्रा प्रस्तावित थी, लेकिन 9 सितंबर को MHA के साथ होने वाली बातचीत के मद्देनजर इसे फिलहाल टाल दिया गया है।

वांगचुक ने चेतावनी दी कि अगर बातचीत से कोई संतोषजनक नतीजा नहीं निकलता है, तो 24 सितंबर से लगभग पांच दिन पहले इस मार्च को फिर से शुरू किया जा सकता है।

विधानसभा के ड्राफ्ट का इंतजार एपेक्स बॉडी को उम्मीद है कि 9 सितंबर की बैठक में केंद्र सरकार प्रस्तावित लद्दाख विधानसभा पर एक विस्तृत ड्राफ्ट पेश करेगी, जिसमें वहां की शक्तियों और अधिकारों का स्पष्ट ब्योरा होगा। वांगचुक ने देशवासियों से अपील करते हुए कहा, “हम एक बार फिर पूरे भारत के लोगों से अपील करेंगे कि वे पर्यावरण और देश की सीमाओं पर डटे लद्दाख के लोगों के समर्थन में आगे आएं।”

गौरतलब है कि अगस्त 2019 में लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश (UT) का दर्जा मिलने के बाद से ही लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) मिलकर लोकतांत्रिक अधिकारों, राज्य के दर्जे और छठी अनुसूची लागू करने की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं।