जानिए CEC ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल की स्वतंत्र जांच की मांग क्यों उठी?

cec gyanesh kumar

इंडियन पीपुल्स फ्रंट (IPF) ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) की कार्यप्रणाली, मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और तकनीकी प्रक्रियाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी के अध्यक्ष शेखर दीक्षित ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में लिए गए प्रशासनिक और तकनीकी निर्णयों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की है। संगठन का कहना है कि तकनीकी और प्रक्रियात्मक खामियों के कारण किसी भी पात्र भारतीय नागरिक को उसके मतदान के अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।

आईपीएफ ने निर्वाचन प्रणाली पर जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए मतदाता सूची से जुड़ी हर प्रशासनिक और डिजिटल प्रक्रिया को पारदर्शी और ऑडिट योग्य बनाने पर जोर दिया है।

ECINet सॉफ्टवेयर और वैधानिक अधिकारों का टकराव

आईपीएफ ने चुनाव आयोग के ECINet सिस्टम के संचालन में जवाबदेही तय करने की मांग की है। शेखर दीक्षित ने कहा कि ECINet या किसी अन्य सॉफ्टवेयर प्रणाली को इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) या असिस्टेंट इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (AERO) के वैधानिक अधिकारों से ऊपर नहीं रखा जा सकता। संगठन की दलील है कि किसी सक्षम अधिकारी द्वारा कानून के तहत लिए गए निर्णय को महज तकनीकी या सॉफ्टवेयर कारणों से निष्प्रभावी करना उचित नहीं है।

मतदाता सूची का स्वतंत्र ऑडिट और ‘एक्सक्लूडेड लिस्ट’ सार्वजनिक करने की मांग

संगठन की प्रमुख मांगों में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया का स्वतंत्र और पारदर्शी ऑडिट कराना शामिल है। दीक्षित के मुताबिक, अगर किसी मतदाता का नाम पूर्व की सूची में दर्ज था और बाद की सूची से हटा दिया गया है, तो उसे इसका स्पष्ट कारण बताया जाना चाहिए।

आईपीएफ ने चुनाव आयोग से ‘एक्सक्लूडेड वोटर्स लिस्ट’ (Excluded Voters List) को कानूनी और गोपनीयता सुरक्षा के दायरे में रहते हुए सार्वजनिक करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि मतदाताओं को यह जानने का पूरा अधिकार है कि उनका नाम किस आधार पर और किस सक्षम अधिकारी द्वारा हटाया गया है, साथ ही उनके पास अपील करने का क्या वैधानिक उपाय है।

विवादित चुनावी प्रक्रियाओं का हो कानूनी परीक्षण

आईपीएफ अध्यक्ष ने ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में संपन्न हुए चुनावों और मतदाता सूची से जुड़ी विवादित प्रक्रियाओं का विधिसम्मत परीक्षण कराने की बात कही है। संगठन का मत है कि जिन मामलों में दस्तावेजी साक्ष्यों के साथ ठोस सवाल उठे हैं, उनकी सक्षम संवैधानिक या न्यायिक मंच पर जांच होनी चाहिए।

पार्टी ने निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता को बनाए रखते हुए उसकी प्रशासनिक और तकनीकी जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए संसद में व्यापक चर्चा कराने का भी प्रस्ताव रखा है।

शेखर दीक्षित ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव ही लोकतंत्र की बुनियाद हैं। मतदाता सूची शुद्ध और अद्यतन होनी चाहिए, लेकिन हर नागरिक को उसके आवेदन, नाम की स्थिति, आपत्ति और सुनवाई की जानकारी समयबद्ध तरीके से मिलनी चाहिए। यदि किसी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से हटाया गया है, तो कानून के तहत उसे तुरंत बहाल करने की प्रभावी व्यवस्था की जानी चाहिए।