पालघर में बसेगी Mumbai 4.0, जानें बुलेट ट्रेन और पोर्ट समेत मेगा प्रोजेक्ट्स
मुंबई: मुंबई में लगातार बढ़ती आबादी और संसाधनों पर बढ़ते दबाव के बीच एक बड़ी खबर है। नवी मुंबई (Mumbai 2.0) और रायगढ़ में प्रस्तावित तीसरी मुंबई (Mumbai 3.0) के बाद अब महाराष्ट्र सरकार ने ‘चौथी मुंबई’ (Mumbai 4.0) बसाने की पूरी तैयारी कर ली है। यह नया और अत्याधुनिक शहर पालघर जिले में विकसित किया जाएगा। विरार और वसई बेल्ट के साथ बोईसर और वधावन के बीच बसने वाली यह ‘चौथी मुंबई’ रफ्तार और इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में मौजूदा मुंबई को भी पीछे छोड़ देगी।
कैसी होगी ‘चौथी मुंबई’?
पालघर जिला, जो मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) का हिस्सा है, धीरे-धीरे व्यापार, लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक हब बनता जा रहा है। 2030 तक MMR की अर्थव्यवस्था को 140 अरब डॉलर से बढ़ाकर 300 अरब डॉलर करने के एमएमआरडीए (MMRDA) के लक्ष्य में मुंबई 4.0 एक प्रमुख कड़ी है।
इस नए शहर में भारत का सबसे बड़ा मेगा पोर्ट, देश का पहला ऑफशोर (समुद्र में बना) एयरपोर्ट, दो बुलेट ट्रेन स्टेशन, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का लिंक और विरार-अलीबाग मल्टी-मॉडल कॉरिडोर शामिल होंगे।
मुंबई से मुंबई 4.0 तक का सफर:
-
मुंबई 1.0: साउथ और सेंट्रल मुंबई, बांद्रा, अंधेरी, बोरीवली, कुर्ला, दादर आदि।
-
मुंबई 2.0: वाशी, नेरुल, खारघर, सीवुड्स और पनवेल जैसे इलाकों वाली नवी मुंबई।
-
मुंबई 3.0: रायगढ़ जिले के उरण, पेन और पनवेल तालुका के 124 गांव (अटल सेतु और नवी मुंबई एयरपोर्ट के करीब)।
-
मुंबई 4.0 (चौथी मुंबई): पालघर में वधावन, दहाणू, बोईसर, वसई-विरार बेल्ट और पालघर तालुका का तटीय क्षेत्र।
वधावन पोर्ट: दुनिया के टॉप 10 बंदरगाहों में होगा शामिल
मुंबई 4.0 का सबसे बड़ा गेम चेंजर चिंचानी बीच पर बन रहा वधावन पोर्ट (Vadhavan Port) होगा। जेएनपीए (JNPA) और महाराष्ट्र मैरीटाइम बोर्ड 76,220 करोड़ रुपये की लागत से 1,448 हेक्टेयर में इस ग्रीनफील्ड पोर्ट को विकसित कर रहे हैं। 20 मीटर गहरे ड्राफ्ट वाला यह पोर्ट दुनिया के सबसे बड़े जहाजों को संभालने में सक्षम होगा और इसकी क्षमता मौजूदा JNPA से तीन गुना अधिक होगी। इससे 10 लाख रोजगार पैदा होने की उम्मीद है।
देश का पहला ‘ऑफशोर एयरपोर्ट’ और कनेक्टिविटी
मुंबई 4.0 में भारत का पहला समुद्र में बना (ऑफशोर) एयरपोर्ट प्रस्तावित है। यह एयरपोर्ट बुलेट ट्रेन, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, उत्तन-विरार सी-लिंक और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के करीब होगा। इसके अलावा, बोईसर और पालघर तालुका में सिडको (CIDCO) एक आधुनिक औद्योगिक टाउनशिप बसा रही है, जो इसे मैन्युफैक्चरिंग का बड़ा सेंटर बनाएगी।
बुलेट ट्रेन और एक्सप्रेसवे से रफ्तार पकड़ेगा शहर
इस नए शहर की कनेक्टिविटी बेहद मजबूत होगी:
-
बुलेट ट्रेन: वसई-विरार बेल्ट की भीड़भाड़ कम करने के लिए बोईसर और विरार में बुलेट ट्रेन के स्टेशन बनाए जा रहे हैं। बोईसर से बीकेसी (बांद्रा) का सफर मात्र 30 मिनट में पूरा होगा। बुलेट ट्रेन कॉरिडोर की 7 सुरंगें पालघर जिले से ही गुजरेंगी।
-
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे: वडोदरा-मुंबई एक्सप्रेसवे का एक बड़ा जंक्शन पालघर से गुजरेगा, जिससे मुंबई और वडोदरा के बीच का सफर 8 घंटे से घटकर 4 घंटे रह जाएगा।
-
सी-लिंक और ब्रिज: 58,754 करोड़ रुपये का 6 लेन उत्तन-विरार सी-लिंक सीधे मुंबई-अहमदाबाद नेशनल हाईवे से जुड़ेगा। वहीं, 850 करोड़ रुपये का नारंगी क्रीक ब्रिज वसई-विरार को पालघर और बोईसर से सीधे जोड़ेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि पालघर, तारापुर, बोईसर और वधावन का यह नया क्लस्टर भारत के समुद्री व्यापार (ब्लू इकोनॉमी) और महाराष्ट्र की जीडीपी ग्रोथ को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।
