September 15, 2026

दिल्ली के स्कूलों में लगेगी जेनजी पाठशाला, जानें क्या-क्या होगा?

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जंतर-मंतर पर जेनजी युवाओं के प्रदर्शन के दौरान हुए पथराव और उसके बाद पुलिस की कार्रवाई ने युवाओं के व्यवहार, सोशल मीडिया के प्रभाव और कानून की समझ को लेकर बहस छेड़ दी थी। अब दिल्ली पुलिस ने इसी पृष्ठभूमि में स्कूलों में ‘जेनजी पाठशाला’ शुरू करने का फैसला किया है। इस पहल का मकसद छात्रों को केवल नियम बताना नहीं, बल्कि उन्हें जिम्मेदार और जागरूक नागरिक बनने के लिए तैयार करना है।

इस अभियान की शुरुआत अगले सप्ताह पूर्वी दिल्ली के मयूर विहार स्थित विद्या बाल भवन स्कूल से होने जा रही है। यहां कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों के साथ पुलिस अधिकारी सीधे संवाद करेंगे। छात्रों को यह समझाने की कोशिश की जाएगी कि किसी संदेश, वीडियो या सोशल मीडिया पोस्ट को बिना जांचे आगे बढ़ाने से किस तरह परेशानी खड़ी हो सकती है।

दिल्ली के सभी जिलों तक पहुंचेगी जेनजी पाठशाला

पहल की शुरुआत पूर्वी दिल्ली से होगी, लेकिन बाद में इसे राजधानी के दूसरे जिलों के स्कूलों तक भी ले जाने की योजना है। कार्यक्रम में डीसीपी और एसीपी स्तर के अधिकारी विद्यार्थियों से बातचीत करेंगे। पूर्वी दिल्ली के डीसीपी राजीव कुमार भी छात्रों के साथ कानून व्यवस्था और सामाजिक जिम्मेदारियों जैसे विषयों पर चर्चा करेंगे।

इन सत्रों में ट्रैफिक नियम, साइबर अपराध, सोशल मीडिया का इस्तेमाल, अनुशासन और कानून का पालन जैसे विषय शामिल होंगे। पुलिस का प्रयास रहेगा कि छात्रों को कठिन कानूनी भाषा के बजाय रोजमर्रा के उदाहरणों के जरिए समझाए जाए।

लेक्चर नहीं, बातचीत के जरिए होगी पढ़ाई

जेनजी पाठशाला को सामान्य कक्षा या लंबे पुलिस लेक्चर की तरह नहीं रखा जाएगा। कार्यक्रम में सवाल-जवाब और इंटरएक्टिव संवाद पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। वीडियो प्रेजेंटेशन के माध्यम से वास्तविक घटनाओं को विद्यार्थियों के सामने रखा जाएगा, ताकि उन्हें यह समझने में मदद मिले कि छोटी-सी लापरवाही भी कभी-कभी गंभीर परिणामों में बदल सकती है।

इसके अलावा एआई की मदद से तैयार शिक्षाप्रद कहानियों का भी इस्तेमाल किया जाएगा। इन कहानियों के जरिए साइबर फ्रॉड, अफवाह फैलाने, गलत जानकारी साझा करने या कानून तोड़ने के संभावित परिणामों को आसान तरीके से समझाया जाएगा।

जंतर-मंतर की घटना के बाद क्यों जरूरी हुई पहल?

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान युवाओं में कानून और सामाजिक जिम्मेदारी की समझ मजबूत करने की जरूरत समझी गई। पुलिस का मानना है कि युवाओं को कार्रवाई के जरिए नियंत्रित करने के बजाय जागरूक करना ज्यादा प्रभावी हो सकता है।

छात्रों से लिया जाएगा फीडबैक

कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों से प्रतिक्रिया भी ली जाएगी। इससे पुलिस को यह समझने में मदद मिलेगी कि छात्रों ने किन विषयों को बेहतर तरीके से समझा और किन मुद्दों पर उन्हें अभी और जानकारी की जरूरत है।