September 15, 2026

सत्य निकेतन हादसे के पीछे लापरवाही? दिल्ली में पहले भी ढही हैं अवैध इमारतें

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दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्रों के हब सत्य निकेतन में 30 साल पुरानी जर्जर इमारत के ढहने से हुए दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर सिस्टम की घोर लापरवाही को उजागर कर दिया है। यह कोई पहला मौका नहीं है जब प्रशासन की अनदेखी और बिजनेस बढ़ाने की होड़ में हुए अवैध निर्माण के कारण राजधानी में बेगुनाहों को अपनी जान गंवानी पड़ी हो।

सत्य निकेतन पीजी हादसा
सितम्बर 2026

सत्य निकेतन की संकरी गली में एक 30 साल पुरानी इमारत भरभराकर गिर गई। अवैध रूप से मंजिलें बढ़ाकर चलाए जा रहे इस पीजी के मलबे में दबकर अब तक 6 लोगों की मौत हो चुकी है। हादसे के 20 घंटे बाद भी रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है और कई छात्र अब भी जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं।

रोहिणी निर्माणाधीन इमारत हादसा
8 जुलाई 2026

रोहिणी इलाके में एक चार मंजिला निर्माणाधीन इमारत ताश के पत्तों की तरह ढह गई। मलबे के नीचे दबने से वहां काम कर रहे 3 मजदूरों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हुआ था।

सैदुलाजाब (साकेत) कमर्शियल बिल्डिंग हादसा
30 मई 2026

साकेत मेट्रो स्टेशन के पास सैदुलाजाब इलाके में एक पांच मंजिला अवैध कमर्शियल इमारत बगल की कैंटीन पर जा गिरी। वीकेंड के कारण कैंटीन में खाना खा रहे कई छात्र मलबे में दब गए। इस हादसे में 6 लोगों की जान चली गई और 10 को रेस्क्यू कर बाहर निकाला गया।

वेलकम आवासीय इमारत हादसा
जुलाई 2025

नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली के वेलकम इलाके में एक 4 मंजिला पुरानी और जर्जर आवासीय इमारत अचानक भरभरा कर गिर गई थी, जिसमें 10 से ज्यादा लोग रहते थे। इस हादसे में कई लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी।

पहाड़गंज बेसमेंट हादसा
17 मई 2025

तेज आंधी और बारिश के कारण पहाड़गंज में एक निर्माणाधीन इमारत का बेसमेंट ढह गया। दीवार के मलबे के नीचे दबकर 3 मजदूरों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया था।

मुस्तफाबाद बिल्डिंग हादसा
18 अप्रैल 2025

मुस्तफाबाद इलाके में एक 4 मंजिला इमारत गिरने से 11 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी। घटना के बाद सामने आया था कि वह पूरा इलाका और निर्माण अवैध था।

लगातार हो रहे इन हादसों के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि जर्जर और अवैध रूप से बहुमंजिला होती इमारतों पर प्रशासन का ध्यान समय रहते क्यों नहीं जाता? कॉलोनियों के बसते समय और अवैध निर्माण के दौरान आंखें मूंदे रहने वाला सिस्टम अक्सर तभी जागता है, जब आम नागरिक अपनी जान गंवा चुके होते हैं।