आज आसमान में दिखेगा अद्भुत नजारा, 96% चांद पर पड़ेगी धरती की छाया, जानें भारत में क्यों नहीं दिखेगा ग्रहण
Chandra Grahan 2026: 28 अगस्त 2026 को साल का आखिरी चंद्र ग्रहण होने जा रहा है। यह खगोलीय घटना इसलिए खास मानी जा रही है क्योंकि ग्रहण के चरम पर चंद्रमा का करीब 96 प्रतिशत हिस्सा पृथ्वी की गहरी छाया यानी अंब्रा में पहुंच जाएगा। हालांकि तकनीकी रूप से यह आंशिक चंद्र ग्रहण होगा, लेकिन चांद का इतना बड़ा हिस्सा ढकने के कारण इसका नजारा कई जगहों से लगभग पूर्ण चंद्र ग्रहण जैसा दिखाई दे सकता है।
भारत में क्यों नहीं दिखेगा चंद्र ग्रहण?
भारत में रहने वाले लोगों को इस बार चंद्र ग्रहण का सीधा नजारा देखने को नहीं मिलेगा। इसकी वजह ग्रहण का समय और उस दौरान चंद्रमा की स्थिति है। ग्रहण के प्रमुख चरणों के दौरान भारत में चंद्रमा क्षितिज के नीचे रहेगा। ऐसे में दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई समेत देश के ज्यादातर हिस्सों से इसे खुले आसमान में देखना संभव नहीं होगा।
हालांकि खगोल प्रेमी ऑनलाइन लाइव स्ट्रीमिंग के जरिए ग्रहण देख सकते हैं। जिन देशों में यह घटना दिखाई देगी, वहां की वेधशालाओं और खगोलीय संस्थानों की लाइव कवरेज इसके लिए विकल्प हो सकती है।
इन देशों में दिखेगा अद्भुत नजारा
इस चंद्र ग्रहण को उत्तर और दक्षिण अमेरिका के कई हिस्सों में देखा जा सकेगा। न्यूयॉर्क, रियो डी जेनेरो और ब्यूनस आयर्स जैसे शहरों में मौसम साफ होने पर लोग ग्रहण का आनंद ले सकेंगे। यूरोप के लंदन, पेरिस, रोम, मैड्रिड, बर्लिन, वियना, प्राग और ब्रसेल्स जैसे शहरों से भी इसके अलग-अलग चरण दिखाई दे सकते हैं। अफ्रीका के कुछ हिस्सों में भी ग्रहण नजर आएगा।
हालांकि हर जगह ग्रहण का पूरा चरण दिखाई दे, यह जरूरी नहीं है। किसी स्थान पर चंद्रमा के उदय या अस्त होने के कारण केवल ग्रहण का कुछ हिस्सा ही देखा जा सकता है।
96% चांद पर पड़ेगी पृथ्वी की छाया
इस ग्रहण की सबसे बड़ी खासियत इसका गहरा आंशिक चरण है। जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच नहीं, बल्कि पृथ्वी की छाया से गुजरता है, तब चंद्र ग्रहण होता है। आज चंद्रमा का करीब 96% हिस्सा अंब्रा में जाने वाला है। केवल छोटा-सा हिस्सा गहरी छाया से बाहर रहेगा, इसलिए यह दृश्य बेहद प्रभावशाली हो सकता है।
ग्रहण के दौरान चंद्रमा लाल या तांबे जैसा भी दिखाई दे सकता है। ऐसा पृथ्वी के वातावरण से गुजरने वाली सूर्य की रोशनी के कारण होता है। लाल और नारंगी प्रकाश का कुछ हिस्सा वातावरण से होकर चंद्रमा तक पहुंचता है, जिससे उसकी सतह पर लालिमा नजर आती है।
क्या सूतक काल मान्य होगा?
धार्मिक मान्यताओं में ग्रहण से पहले सूतक काल का उल्लेख मिलता है। आम तौर पर इसे ग्रहण दिखाई देने वाले क्षेत्रों से जोड़ा जाता है। चूंकि आज का चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए कई पंचांगों के अनुसार यहां सूतक काल मान्य नहीं माना जाएगा। हालांकि धार्मिक नियम अलग-अलग परंपराओं में भिन्न हो सकते हैं।
चंद्र ग्रहण को खुली आंखों से देखना सामान्यतः सुरक्षित माना जाता है। लेकिन भारत से यह ग्रहण प्रत्यक्ष दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां लोग ऑनलाइन प्रसारण के जरिए इस दुर्लभ खगोलीय नजारे का आनंद ले सकते हैं।
